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Noida News: 10 साल बाद बेगुनाह साबित हुए 68 साल के बुजुर्ग

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(अदालत से)
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-चिकित्सीय साक्ष्य और गवाहों की गवाही में भारी विरोधाभास, पाॅक्सो अदालत ने आरोपी काे किया बरी

-अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपराध साबित करने में विफल
-वर्ष 2016 में नोएडा की सेक्टर-20 कोतवाली में बुजुर्ग के खिलाफ दर्ज की गई थी प्राथमिकी

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अदालत ने 10 साल से जेल बंद में 68 वर्षीय बुजुर्ग आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। न्यायाधीश ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष साक्ष्यों के माध्यम से आरोपी का अपराध सिद्ध करने में विफल रहा है।
मामला 8 अगस्त 2016 को सेक्टर-20 कोतवाली नोएडा में दर्ज किया गया था। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया था गया कि 5 अगस्त 2016 को एक नाबालिग और बुजुर्ग आरोपी ने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपहरण किया था। ट्रायल के दौरान एक आरोपी को नाबालिग पाया गया। जिसके बाद उसकी फाइल अलग करके किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी गई थी। पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि 7 अगस्त 2016 को जब वह घर पर अकेली थी। तब नाबालिग और बुजुर्ग आरोपी उसके घर आए। उसके मुंह पर जबरदस्ती रूमाल रखा जिससे वह बेहोश हो गई। दोनों आरोपी उसे अपने कमरे में ले गए। जहां दो दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने लड़की, उसके माता-पिता, जांच अधिकारी और मेडिकल परीक्षण करने वाले डॉक्टर सहित पांच गवाह पेश किए। वहीं बचाव पक्ष ने तीन गवाह पेश करते हुए अदालत को बताया कि घटना के समय आरोपी अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए बाहर गया हुआ था। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि एफआईआर की लिखित शिकायत एक ऐसे व्यक्ति ने तैयार की थी, जिसका आरोपी से लंबे समय से संपत्ति विवाद चल रहा था। अदालत ने कहा कि मेडिकल जांच में किसी प्रकार के यौन उत्पीड़न या अन्य हिंसा के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। गवाहों के बयानों में अपहरण की तारीख को लेकर आपस में और अपने-अपने बयानों में भी गंभीर विरोधाभास है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी किया गया।
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