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Noida News: पाॅक्सो मामले में कोर्ट का रुख सख्त, सीबीआई की रिमांड अर्जी खारिज

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(अदालत से)
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- सबूतों की कमी और आरोपी के सहयोग को देखते हुए कोर्ट ने कर दिया रिहा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट-1) की अदालत ने साइबर टिपलाइन के आधार पर दर्ज पॉक्सो के एक मामले में सीबीआई की पुलिस हिरासत रिमांड की अर्जी को खारिज कर दिया। मामले में आरोपी आनंद प्रकाश को रिहा कर दिया गया। न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु ने अपने आदेश में कहा कि मामले में पर्याप्त सबूतों की कमी है और आरोपी ने शुरू से ही जांच में पूर्ण सहयोग किया है।
मामला साइबर टिप लाइन पर मिली एक अनाम शिकायत पर आधारित है। साइबर टिपलाइन रिपोर्ट गृह मंत्रालय द्वारा संचालित 14सी पर आधारित अनाम रिपोर्ट से प्राप्त हुई थी। इसके आधार पर सीबीआई ने 31 अक्तूबर 2025 को एसकेए ग्रीन आर्क सोसाइटी ग्रेटर नोएडा निवासी आनंद प्रकाश के खिलाफ आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में आईपीसी की अन्य धाराओं को बढ़ाया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि यौन उत्पीड़न की तस्वीरें पीड़िता को दिखाई गईं। जिसका पता बिसरख कोतवाली क्षेत्र के अधीन एक गांव से लगाया गया था। पीड़िता ने आरोपी की पहचान कर बताया कि यह घटना जांच की तारीख से लगभग दो साल पहले हुई थी। पीड़िता का बयान दर्ज किया गया। जिसमें आरोपी की संलिप्तता पाई गई।
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वहीं आरोपी के वकील रजनीश यादव ने कहा कि पीड़िता द्वारा आरोपी की पहचान का कोई साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। पीड़िता द्वारा तस्वीरों के माध्यम से टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड रहस्य में है। सीबीआई के वकील द्वारा बताई गई अपराध की जानकारी स्पष्ट नहीं है। आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट की धारा के तहत दावा आरोपी के मोबाइल से सिद्ध नहीं होता। जिसे सीबीआई ने कथित रूप से आरोपी से जब्त किया है।
अदालत ने पाया कि साइबर टिप लाइन के माध्यम से अनाम शिकायत और पीड़िता का दावा कि घटना एफआरआई दर्ज करने की तारीख से दो साल पहले हुई थी असंगत और अस्पष्ट प्रतीत होता है, लेकिन एफएसएल रिपोर्ट अभी भी प्रतीक्षित है। पीड़िता द्वारा आरोपी की धुंधली व मॉर्फ की गई अपरिचित तस्वीरों के आधार पर टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड, आरोपित अपराध की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती है। अदालत ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों के अपर्याप्त सबूतों के आधार पर पुलिस हिरासत रिमांड देने से इनकार कर दिया। आरोपी को इस शर्त के साथ रिहा किया जाता है कि वह जांच में सहयोग करेगा।
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सीएसएएम के उल्लंघन पर दर्ज हुआ था मुकदमाः केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की स्पेशल क्राइम यूनिट-3 ने ग्रेटर नोएडा निवासी युवक के एक व्यक्ति के खिलाफ बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) के संग्रह, प्रसारण और अपलोड करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। सीबीआई को सूचना मिली थी कि दो संदिग्ध ईमेल आईडी और दो मोबाइल नंबर का उपयोगकर्ता बाल यौन शोषण सामग्री के संग्रह, प्रसारण, आदान-प्रदान और अपलोड में लिप्त है। यह सामग्री बच्चों को यौन रूप से अश्लील तरीके से दर्शाने वाली तस्वीरों और वीडियो के रूप में थी। इन मोबाइल नंबरों का उपयोग आनंद प्रकाश द्वारा किया जा रहा था। ईमेल आईडी के खिलाफ दो साइबर टिपलाइन रिपोर्ट भी जेनरेट की गई थीं।
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