जिला न्यायाधीश अवनीश सक्सेना ने पत्नी की हत्या के मामले में आरोपी को सबूतों के अभाव और गवाही में विसंगतियों के आधार पर बरी कर दिया। न्यायालय ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। साढ़े तीन साल से अधिक समय से जेल में बंद आरोपी ने अधिवक्ता नहीं कर पाने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से गुहार लगाई थी। इसके बाद लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (एलएडीसीएस) के अधिवक्ता की ओर से आरोपी की कोर्ट में निशुल्क पैरवी की गई।
6 जुलाई 2021 की रात नोएडा के सेक्टर-8 स्थित बी-80 निवासी सुभाष पर अपनी पत्नी बबली (31) को डंडे से पीटकर और गला घोंटकर मारने का आरोप लगाया गया था। मृतक के पिता महेंद्र ने 8 जुलाई को सेक्टर-20 कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें आरोप लगाया गया कि विवाह के बाद से सुभाष बबली को प्रताड़ित करता था। मामले में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से एलएडीसीएस के डिप्टी अधिवक्ता जितेंद्र कुमार बैसोया व अभियोजन पक्ष से डीजीसी ब्रह्मजीत भाटी ने पैरवी की।
अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि आरोपी के पास अपराध स्थल से डंडा बरामद हुआ था। मृतक के पिता ने गवाही में कहा कि उन्हें घटना की जानकारी अल्लाउद्दीन ने दी, लेकिन स्वतंत्र गवाह ने इससे इनकार किया। मामले में बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि घटना के दिन बबली घर पर अकेली थी। रात में चोर आए और शोर मचाने पर बबली की पिटाई कर दी। जो डंडा पुलिस ने बरामद दिखाया वह फर्जी रूप से प्लांट किया गया है। मामले में बचाव पक्ष की ओर से आरोपी की बहन आरती और बेटी मनीषा ने बताया कि घटना के वक्त आरोपी उनके साथ था। न्यायालय ने कहा अभियोजन आरोपी के खिलाफ पहली नजर में दोष साबित करने में विफल रहा। गवाही में विरोधाभास, पूर्व चोटों के सबूतों का अभाव और गिरफ्तारी प्रक्रिया संदिग्ध है। ऐसे में संदेह का लाभ के कारण आरोपी को बरी किया जाना उचित है।