नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने एक दंपती को सरोगेसी प्रक्रिया अपनाने की अनुमति दी, जबकि पति की उम्र कानूनी अधिकतम सीमा से अधिक थी। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा कि चूंकि दंपती ने यह प्रक्रिया सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के लागू होने से पहले शुरू की थी, इसलिए अधिनियम की आयु सीमा उन पर लागू नहीं होगी।
अधिनियम के अनुसार, सरोगेसी के लिए महिला की उम्र 23 से 50 वर्ष और पुरुष की उम्र 26 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए। मामले में पति की उम्र 57 वर्ष और पत्नी की उम्र 42 वर्ष थी। दंपती ने बताया कि उन्होंने आईवीएफ सहित कई प्रयासों के बाद ही सरोगेसी को अंतिम विकल्प माना। उन्होंने तर्क दिया कि कानून की आयु सीमा उन्हें प्रक्रिया से वंचित कर रही थी और यह उनके प्रजनन स्वायत्तता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है। अदालत ने उनकी यह याचिका मानते हुए कहा कि अधिनियम लागू होने से पहले शुरू की गई प्रक्रिया पर आयु सीमा का कठोर पालन भेदभावपूर्ण और मनमाना होगा। इस फैसले से उन दंपतीयों को राहत मिली है जिन्होंने सरोगेसी प्रक्रिया पहले शुरू की थी, लेकिन अब कानूनी बाधाओं के कारण उसे पूरा नहीं कर पा रहे थे। संवाद