मानसिक रूप से मंद बच्ची से दुष्कर्म और साक्ष्य मिटाने के आरोपी दंपती बरी
- पीड़िता और उसकी मां के अदालत में पलटने से आरोपियों को मिला लाभ
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने मानसिक रूप से मंद बच्ची से दुष्कर्म और साक्ष्य मिटाने के मामले में आरोपी दंपती को बरी कर दिया है। यह फैसला गवाहों के अपने बयानों से पलटने के बाद आया।
यह मामला वर्ष 2020 का है। तब सेक्टर-39 थाने में एक नाबालिग से दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पीड़िता की मां ने बताया था कि बेटी के कपड़ों पर खून के धब्बे थे। बेटी ने पड़ोस में रहने वाले आरोपी के घर गलत काम होने की बात कही थी। पुलिस ने आरोपी अजय के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। बाद में उसकी पत्नी पर सबूत मिटाने का आरोप लगा। पुलिस ने 19 जून 2020 को दोनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां ने घटना से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि बेटी ने उन्हें कभी कुछ नहीं बताया था। पीड़िता ने भी गवाही में कहा कि वह खेलते समय गिरी थी और चोट लगने से खून के धब्बे आए थे। उसने पुलिसकर्मियों के कहने पर बयान देने की बात कही। अदालत ने मां और पीड़िता दोनों को पक्षद्रोही घोषित किया। अभियोजन पक्ष कहानी का समर्थन नहीं कर पाया, जिससे दंपती बरी हुए।