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Noida News: सीपीआर में हाथों की सही स्थिति मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण

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जिम्स के शोधकर्ताओं के एक समीक्षा अध्ययन में आया सामने
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। कार्डियक अरेस्ट के दौरान कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) की सफलता में चेस्ट कम्प्रेशन के दौरान हाथों की सही स्थिति निर्णायक होती है। यह निष्कर्ष ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के शोधकर्ताओं के एक समीक्षा अध्ययन में सामने आया है।
शोध में सीपीआर के चेस्ट कम्प्रेशन के लिए हाथों की उपयुक्त स्थिति से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का विश्लेषण किया गया। चिकित्सकों ने पाया कि अच्छी गुणवत्ता वाले चेस्ट कम्प्रेशन के लिए हाथों का सही स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह हृदय और मस्तिष्क तक पर्याप्त रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद करता है। इससे कार्डियक अरेस्ट के मरीज के जीवित बचने की संभावना बढ़ती है। हालांकि, अध्ययन में हाथों की आदर्श स्थिति को लेकर विभिन्न दिशा-निर्देशों में मतभेद भी सामने आया है। सीमित वैज्ञानिक प्रमाणों के कारण इस विषय पर स्पष्ट मानक नहीं बन पाए हैं। शोधकर्ताओं ने अधिक नैदानिक शोध और साक्ष्य-आधारित मानकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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तुरंत और सही तकनीक से सीपीआर बढ़ाता है बचने की संभावना
अध्ययन में पाया गया है कि यदि आसपास मौजूद व्यक्ति तुरंत और सही तकनीक से सीपीआर देता है, तो मरीज के बचने की संभावना कई गुना बढ़ सकती है। इसलिए केवल सीपीआर सिखाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि चेस्ट कम्प्रेशन की सही तकनीक और हाथों की सटीक स्थिति पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। जिम्स के एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर एवं पेन मेडिसिन विभाग की सहायक प्रोफेसर गरिमा सिन्हा ने कहा कि यह अध्ययन स्वास्थ्यकर्मी, पैरामेडिकल कर्मी और आम लोगों के लिए सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाएगा। हाथों की स्थिति के मानकीकरण से चेस्ट कम्प्रेशन की गुणवत्ता सुधरेगी, आत्मविश्वास बढ़ेगा और आपातकालीन स्थितियों में अधिक जिंदगियां बचेंगी।
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