बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर लोग कोरोना फोबिया के भी शिकार हो रहे हैं। इसके कारण मामूली रूप से संक्रमित मरीज भी गौतमबुद्ध नगर के आसपास के निजी व सरकारी अस्पतालों में भर्ती हो गए हैं। इससे गंभीर व अतिगंभीर मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहा है। जिला प्रशासन ऐसे मरीज व अस्पताल के खिलाफ जांच अभियान चला कर मरीजों को डिस्चार्ज करा रहा है। शनिवार को भी जिले में अभियान चलाया गया।
कोरोना संक्रमित मरीजों को बेहतर उपचार सुविधा मुहैया कराने के लिए स्थापित इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार से जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच अभियान शुरू किया गया है। सीएमओ की निगरानी में टीम ने शनिवार को भी विभिन्न अस्पतालों में जांच कर मरीजों को डिस्चार्ज कराया। इससे अधिकांश अस्पतालों में बेड की उपलब्धता हो गई।
कंट्रोल रूम व निजी स्तर पर गंभीर व अतिगंभीर रूप से संक्रमित मरीजों के लिए अब बेड उपलब्ध होंगे। अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मामूली रूप से संक्रमित मरीजों का उपचार करें पर उन्हें भर्ती न करें। गंभीर व अतिगंभीर मरीजों को उनकी स्थिति देखकर भर्ती करें। इससे बेड की मारामारी काफी हद तक कम होगी।
इन अस्पतालों में शुक्रवार को बेड कराया खाली:
जिम्स-20 बेड, यथार्थ अस्पताल 62, कैलाश अस्पताल 33, शारदा अस्पताल 15, जेपी अस्पताल 23, फोर्टिस अस्पताल 4, प्रकाश अस्पताल 30, 39-कोविड अस्पताल 19, इंडोगल्फ अस्पताल 2, जेआर अस्पताल 7, एसआरएस 2, सूर्या अस्पताल 5, मेट्रो अस्पताल में 4 बेड खाली कराए गए हैं।
कंट्रोल रूम में तैनात मरीज डिस्चार्ज सेल के नोडल अधिकारी डॉक्टर जसलाल ने बताया कि शुक्रवार को 226 बेड विभिन्न अस्पतालों में खाली कराए गए। इसकी रिपोर्ट सीएमओ के माध्यम से जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। शनिवार को भी अभियान चलाया गया है। जिलाधिकारी के द्वारा अस्पतालों पर कार्रवाई संभव है।