फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मैजिक बुलेट नहीं है कोरोना का वैक्सीन, देरी से दिखता है असर : डॉ. गुलेरिया

विज्ञापन
विज्ञापन
नई दिल्ली। कोरोना वायरस की दूसरी लहर को लेकर दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कोरोना की वैक्सीन कोई मैजिक बुलेट नहीं है। शुक्रवार को डॉ. गुलेरिया ने कहा कि टीकाकरण संक्रमण को नियंत्रित करने का का एक माध्यम है लेकिन ये एक मैजिक बुलेट नहीं है। क्योंकि वैक्सीन का असर आने में 4-6 हफ्ते लगेंगे। दूसरी डोज के दो हफ्ते बाद ही एंटीबॉडी विकसित हो सकती हैं।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि परीक्षण के दौरान वैक्सीन का प्रभाव 70-80 फीसदी लोगों पर ही हुआ था। इससे स्पष्ट है कि 20 से 30 फीसदी लोग वैक्सीन लगने के बाद भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होंगे। इसीलिए वैक्सीन के साथ-साथ सावधानी बहुत जरूरी है। डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना केस बढ़ने के कई कारण हैं। इनमें से है लोगों की लापरवाही। जब कोरोना केस कम हुए थे और वैक्सीन लगना शुरू हुई थी तो बहुत लोगों ने ये सोचा कि कोविड अब खत्म हो गया है, मास्क लगाने की जरूरत नहीं है, सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत नहीं है। उन्होंने पार्टियां करना शुरू कर दी। जबकि हकीकत यह है कि वायरस कहीं गया नहीं था, वायरस यहीं था। इस बीच दुनिया में कई नए स्वरूप भी आ गए। उन्होंने कहा कि दूसरी लहर से बाहर आने के लिए एक तरफ सख्ती करनी होगी कि सभी लोग नियमों का पालन करें। दूसरी ओर पहले की तरह संक्रमितों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों को आइसोलेट करना होगा। ज्यादा केस वाले क्षेत्र को कंटेंमेंट जोन बनाना होगा। वहां एक प्रकार से लॉकडाउन लगा सकते हैं ताकि वहां से कोई बाहर न जा पाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें