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‘कॉप-14’ में मरुस्थलीकरण पर एकजुट होकर लड़ने का लिया संकल्प

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मरुस्थलीकरण पर एकजुट होकर लड़ने का संकल्प
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इंडिया एक्सपो मार्ट में 14वें ग्लोबल कंवेंशन ‘कॉप-14’ का उद्घाटन
ग्रेटर नोएडा। बंजर होती भूमि, कम होती पैदावार और मरुस्थलीकरण का सामना करने के लिए सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के 12 दिवसीय कॉप-14 (14वां कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज) का शुभारंभ इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में हुआ। कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण प्रतिरोध सभा (यूएनसीसीडी ) के कार्यकारी सचिव इब्राहिम थियाव, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर और राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो शामिल हुए। प्रकाश जावडेकर ने कहा कि व्यापक स्तर पर जागरूकता तथा लोगों की भागीदारी समय की आवश्यकता है। चाहे जलवायु परिवर्तन हो या मरुस्थलीकरण। मानव के कार्यों ने प्रकृति के संतुलन को नुकसान पहुंचाया है, इसके लिए एकजुट होकर लड़ने की आवश्यकता है।
9 सितंबर को प्रधानमंत्री करेंगे बैठक का उद्घाटन
कॉप-14 में पहले दिन दो ओपन कांफ्रेंस हुईं। जिसमें मिट्टी की गिरती उर्वरता पर चिंता प्रकट की गई। इससे पूर्व भारत और यूनाइटेड नेशन के राष्ट्र ध्वज फहराए गए और राष्ट्रगान हुए। इस दौरान जावडेकर ने कहा कि अब लोग ऐसा अनुभव करते हैं कि मानव कार्यों से कुछ नुकसान पहुंचा है तो सकारात्मक कार्यों से उस नुकसान को कम किया जा सकता है। आने वाली पीढ़ियों को हम एक बेहतर दुनिया दे सकते हैं। कृषि योग्य भूमि को संरक्षित करने के लिए विश्व स्तर पर चलाए जाने वाले अभियान पर भी केंद्रीय मंत्री ने अपनी बात रखी। जावडेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नौ सितंबर को होनी वाली बैठक का उद्घाटन करेंगे।
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122 देशों ने जताई सहमति
जावडेकर ने कहा कि 122 देश भूमि निम्नीकरण की समस्या को राष्ट्रीय लक्ष्य बनाने और समावेशी विकास लक्ष्य हासिल करने के लिए सहमत हुए हैं। इन देशों में भारत, ब्राजील, चीन, नाइजीरिया, रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसे सर्वाधिक आबादी वाले शामिल हैं। हम लोग प्रत्येक देश में तेजी से कार्य कर सकते हैं। ऐसे में यूएनसीसीडी बहुत महत्वपूर्ण है। हम आशा करते हैं कि कुछ अच्छे परिणामों को दिल्ली घोषणा पत्र में अधिसूचित किया जाएगा। दिल्ली घोषणा पत्र भविष्य की कार्य योजना की रूपरेखा होगी।
बड़े देशों को मिलकर काम करना होगा: इब्राहिम थियाव
इब्राहिम ने हाल के वैज्ञानिक आकलनों की चेतावनियों पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि मौसम से संबंधित आपदाएं जैसे सूखा, जंगल की आग, अचानक से आई बाढ़ और भूमि का क्षरण हमें चेतावनी दे रही हैं। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि उन्हें बदलाव के अवसरों को ध्यान में रखना चाहिए और इससे संबंधित कार्य करने चाहिए। इब्राहिम ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हम भारत में आकर बहुत भाग्यशाली महसूस कर रहे हैं।
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197 देशों के 7200 प्रतिनिधि पहुंचेंगे
इब्राहिम ने कहा कि यूएनसीसीडी द्वारा आयोजित यह कॉप निसंदेह सबसे बड़ा सम्मेलन है। आशा है कि 197 देशों के लगभग 7200 प्रतिनिधि इस सम्मेलन में शामिल होंगे। प्रतिनिधियों में मंत्री, सरकार के प्रतिनिधि, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, महिलाएं और युवा शामिल हैं। सम्मेलन में लगभग 30 निर्णय लिए जाएंगे। इन निर्णयों से पूरी दुनिया में भूमि के उपयोग की नीतियों को मजबूत बनाया जाएगा। साथ ही सूखे, धूल की आंधी, रेत से होने वाले खतरों से भी निपटने में मदद मिलेगी।
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