कहा- मोदी सरकार ने सही पैरवी नहीं की, केजरीवाल ने भी आवाज नहीं उठाई
चुनाव नजदीक है तो भाजपा और केजरीवाल जाट समाज की भावनाओं से खेल रहे हैं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जाट आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस की तरफ से प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने मोर्चा संभाला। बृहस्पतिवार को उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने चार मार्च 2014 को जाट समाज को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल कर दिल्ली सहित नौ राज्यों में आरक्षण प्रदान किया था। इसके लिए जारी अधिसूचना में दिल्ली के साथ बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जाट समुदाय को आरक्षण दिया गया।
17 मार्च 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने जाट आरक्षण को रद्द कर दिया, क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार ने इसकी पैरवी सही तरीके से नहीं की। उस वक्त दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मुद्दे पर आवाज नहीं उठाई। आज चुनाव नजदीक है तो भाजपा और केजरीवाल जाट समाज की भावनाओं से खेल रहे हैं। यह बेहद शर्मनाक है। वहीं, कांग्रेस नेता चतर सिंह ने कहा कि केजरीवाल के पास या तो पूरी जानकारी नहीं है या वे इसे जनता के सामने रखना नहीं चाहते। उनकी सोच आरक्षण विरोधी है। 2007-2010 के बीच दिल्ली सरकार के ओबीसी आयोग के अध्यक्ष रहते हुए, उन्होंने जाट आरक्षण का मुद्दा देखा था। यह मुद्दा बिना सार्वजनिक सुनवाई के हल नहीं हो सकता था। 2014 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पहल पर केंद्र सरकार ने दिल्ली के जाटों को राष्ट्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए अधिसूचना जारी की, लेकिन 2014 में सरकार बदलने के बाद मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसे रद्द करवा दिया। भाजपा और आप दोनों आरक्षण विरोधी हैं। जाट समाज को गुमराह किया जा रहा है। कांग्रेस ने हमेशा उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ी है और आगे भी लड़ेगी। भाजपा और आप सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों का उपयोग कर रही हैं।