नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं द्वारा प्रोटोकॉल का पालन न करने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि बार के सदस्यों को बार-बार याद दिलाने के बावजूद कुछ वकील चलती कारों से वर्चुअल सुनवाई में शामिल हो रहे हैं, जो न केवल अदालती कार्यवाही में असुविधा पैदा करता है, बल्कि न्यायिक समय की बर्बादी भी करता है।
पीठ ने इस तरह की प्रथाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह न तो अदालत की गरिमा के अनुरूप है और न ही कानूनी पेशे के मानकों को पूरा करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पक्षकारों या अधिवक्ताओं द्वारा इस तरह की अनुचित उपस्थिति को बढ़ावा नहीं दे सकती। यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान आई, जब एक महिला अधिवक्ता चलती कार में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुईं। बार-बार नेटवर्क बाधित होने के कारण वह केवल यह बता सकीं कि उन्होंने अपने मुवक्किल के लिए 2 नवंबर 2025 को वकालतनामा दाखिल किया था। ब्यूरो