संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जिले में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गईं सीएनजी बसें इन दिनों अन्य जिलों में संचालित की जा रही हैं, जबकि स्थानीय नागरिकों को नियमित बस सेवा का लाभ नहीं मिल रहा है। लोगों का आरोप है कि अधिक मुनाफा कमाने के लिए लोकल रूटों पर कुछ दिन संचालन के बाद बसें बंद कर दी जाती हैं। ग्रेटर नोएडा डिपो में 105 सीएनजी बसों में 104 बाहरी रूटों पर चलाई जा रहीं हैं। दादरी से ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट जाने वाले लोगों को निजी वाहनों या डग्गामार बसों का सहारा लेना पड़ता है। इससे यात्रा में ज्यादा समय तो लगता ही है, कई बार ज्यादा किराया भी देना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के समय बसों की संख्या बेहद कम रहती है। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी बस नहीं मिलती।दादरी विधायक तेजपाल नागर ने भी उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री से जिले के अंदरूनी और प्रमुख मार्गों पर सीएनजी बसों का संचालन प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराने की मांग की।
हालांकि परिवहन निगम का कहना है कि जिन रूटों पर सवारियां कम होती हैं और घाटा होता है, उस रूट की बसों को बंद कर दिया जाता है। लोगों ने कहा कि जिले के लिए आईं सीएनजी बसों को बाहरी रूटों पर चलाया जा रहा है, जहां सवारियां अधिक मिलती हैं और निगम को ज्यादा आय होती है। इनमें ग्रेटर नोएडा से आगरा, मथुरा समेत 18 रूट शामिल हैं। इन रूटों में एक भी स्थानीय मार्ग को शामिल नहीं है।
स्थानीय रूटों पर समय-समय पर बसों का संचालन किया जाता रहा है। यदि निगम के मानकों के अनुरूप सवारियां नहीं मिलतीं और रूट घाटे में जाता है तो बसों का संचालन बंद करना पड़ता है।
-राजेश वर्मा, एआरएम, ग्रेटर नोएडा डिपो