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नोएडा इंजीनियर मौत मामला: सीजेएम कोर्ट से दो आरोपियों को मिली जमानत, इन सख्त शर्तों के राहत

Fri, 30 Jan 2026 08:33 PM IST
अनुज कुमार माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा

सार

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत से जुड़े मामले में सीजेएम कोर्ट ने दो लोगों को जमानत दे दी है। अदालत ने यह जमानत कुछ महत्वपूर्ण शर्तों के साथ दी है। दोनों पर निर्माण साइट पर लापरवाही से युवराज की मौत का आरोप था।
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इंजीनियर युवराज की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सेक्टर-150 के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में शुक्रवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले में लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी के कर्मचारी रवि बंसल और सचिन करनवाल को जमानत दी है। अदालत ने शर्तों के साथ जमानत दी है। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ शर्ते भी लगाई है।

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इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने पिता राज कुमार मेहता की तहरीर पर एमजेड विजटाउन व लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर एमजेड बिल्डर कंपनी के निदेशक अभय कुमार के अलावा लोटस ग्रीन के बिल्डर रवि बंसल और सचिन करनवाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। 

आरोपियों के अधिवक्ता व जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी बोड़ाकी ने बताया कि शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया कि आरोपियों ने कोई अपराध नहीं किया है और उन्हें झूठा फंसाया गया है। सुनवाई के दौरान अभियोजन अधिकारी ने न्यायालय को अवगत कराया कि मामला जमानतीय प्रकृति का है। 
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न्यायालय ने अभियोजन अधिकारी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद केस डायरी व अभिलेखों का अवलोकन किया। न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि आरोपियों द्वारा कथित रूप से किया गया अपराध जमानतीय है और प्रकरण के तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए जमानत के पर्याप्त आधार मौजूद हैं। 

हालांकि, अदालत ने आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के एक-एक जमानती व इतनी ही धनराशि के व्यक्तिगत बंधपत्र पर जमानत प्रदान दी है। इसके साथ ही न्यायालय ने कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं। जमानत की शर्तों के अनुसार आरोपी विवेचना में पूर्ण सहयोग करेंगे। बिना न्यायालय की अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे और विवेचना के दौरान अभियोजन साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेंगे। यदि आरोपी विदेश यात्रा करना चाहेंगे, तो उन्हें पूर्व में न्यायालय से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

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