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Noida News: बदहाल हालत में शहर की 30 हजार करोड़ की संपत्तियां, आवंटी लापता

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बदहाल हालत में शहर की 30 हजार करोड़ की संपत्तियां, आवंटी लापता
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आवंटन के बाद कंप्लीशन के लिए छोटे निर्माण कर छोड़े, कोठियों और निर्माण स्थल बने जंगल




माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। हाईटेक शहर में चमचमाती सड़के, ऊंची-ऊंची इमारतें हैं, जो नोएडा को यूपी के प्रवेशद्वार का दर्जा दिलाते हैं वहीं दूसरी ओर शहर में करीब 30 हजार करोड़ की ऐसी बदहाल संपत्तियां भी हैं जो देखरेख के अभाव में चांद में दाग का बोध कराती नजर आती हैं। खास बात यह कि ऐसी संपत्तियों के वारिस भी नहीं मिल रहे। इसकी जानकारी न तो आरडब्ल्यूए के पास है और न ही प्राधिकरण को इसकी सूचना है। सेक्टरों की साफ-सफाई के दौरान जरूरत पड़ने पर इनके मालिकों को खोजा जाता है, लेकिन किसी के पास इनके नाम, पते और मोबाइल नंबर नहीं मिलते। ऐसी संपत्तियां या तो आधी-अधूरी बनी हुई हैं या पूरा प्लॉट खाली है। इनका आवंटन कई वर्ष पहले हो चुका है। प्राधिकरण ने ऐसे करीब 35 हजार प्लॉटों के आवंटन किए। इनमें से करीब 10 से 15 प्रतिशत प्लॉट या तो खाली हैं या फिर आधे-अधूरे निर्माण वाले हैं। जिनकी कीमत एक करोड़ से 15 करोड़ तक है।


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निवेशकों ने अधूरे निर्माण कराकर ले लिया कंप्लीशन
स्थानीय लोगों के अनुसार, ऐसे प्लॉटों पर आधे-अधूरे निर्माण करते हुए दो-चार कमरे बनाकर कंप्लीशन ले लिया गया, फिर इसे छोड़ दिया गया। सूत्रों का कहना है कि ऐसी संपत्तियां उन निवेशकों की हो सकती है जो जमीन की कीमत बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि जिस समय इनका आवंटन हुआ होगा, उस समय इनकी कीमत 50 लाख से लेकर एक करोड़ तक होगी, जो अब पांच करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक जा चुकी है। पॉश सेक्टरों के यह प्लॉट बैंक के ब्याज से कई गुना ज्यादा रिटर्न दे रही हैं। इसके अलावा कई सेक्टरों में ऐसी खाली कोठियों व आधे-अधूरे निर्माण वाले प्लॉट किराये के नाम पर कई लोगों को दिए गए। इसमें अफसर, नेता, निवेशक और भूमाफिया शामिल हैं।
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असली मालिक को नहीं मिलती बिकने की जानकारी

कई बार प्राधिकरण में ऐसी भी चर्चा सुनने को मिलती है कि अमुक प्लॉट को किसी दूसरे ने बेच दिया, जबकि असली मालिक को इसकी जानकारी इसलिए नहीं मिल पाई क्योंकि उसका संपर्क सूत्र किसी के पास नहीं होता है। बाद में जानकारी मिलने पर वह प्राधिकरण में आकर लड़ते हैं। कई बार बनी बनाई कोठी में भी भूमाफिया के कब्जा करने की बात सामने आती रहती है, हालांकि जब तक वहां कोई नहीं रहता तब तक हालात काफी खराब होते हैं।

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12 साल में घर बनाना होगा जरूरी, लेकिन हुआ उलटा
प्राधिकरण के अधिकारी के मुताबिक, आवासीय प्लॉट लेने के बाद 12 वर्ष में घर बनाना जरूरी होता है और 50 प्रतिशत निर्माण के बाद कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिया जा सकता है। इसी नियम को आधार पर बनाकर कंप्लीशन लिए गए और प्लॉट को ऐसे ही छोड़ दिया गया। इसमें ट्रस्ट के नाम पर प्लॉट का आवंटन हुआ। सदस्यों को प्लॉट दिए गए, जो खाली पड़े हुए हैं। इसी तरह से सेक्टर-51, 52, 122, 44, 41, 105, 108, 31, 36, 42, 43 समेत कई सेक्टरों में जमीनें हैं, जिनकी कीमत 10 करोड़ तक है। सेक्टर-145 में किसान कोटे के आवंटन हुए 10-12 साल हो गए हैं, लेकिन विकास नहीं हुआ। ऐसे में प्लॉट खाली पड़े हुए हैं।

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सेक्टर में कई ऐसे प्लॉट हैं जहां झाड़ियां उगी हुई हैं। शाम को वहां जाने में भी डर लगता है। इनको देखने कोई नहीं आता है। - अशोक शर्मा, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए, सेक्टर-52
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यहां करीब 100 प्लाॅट हैं, जो प्राधिकरण से 10 से 15 वर्ष पहले लिए गए। इनका कंप्लीशन कराकर गेट पर ताला लगा दिया गया। प्राधिकरण भी इनकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। - डाॅ. उमेश शर्मा, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए, सेक्टर-122
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अधिकांश कंप्लीशन वाले घर हैं। यहां गंदगी पड़ी हुई है। निवासियों की यह भी शिकायत हैं कंप्लीशन वाले घरों में आपराधिक किस्म के लोग रह रहे हैं, जिससे वारदात होने का डर बना रहता है। - दीपक दिव्य कृष्णात्रेय, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए, सेक्टर-105
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खाली प्लॉट जंगल बन रहे हैं। यहां कई प्लाॅट कंप्लीशन लेकर छोड़ दिए गए हैं। इससे आस-पास के लोगों को परेशानी होती है। - अनीता सिंह, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए, सेक्टर-36
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