जर्जर बुनियाद पर टिकी बच्चों के अस्पताल की इमारत
प्रमुख सचिव की फटकार के बाद भी चाइल्ड पीजीआई के हालात जस के तस
बेसमेंट में छत से टपक रहा पानी, दीवारों से गिर रहा प्लास्टर, हादसे का खतरा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई की बहुमंजिला इमारत जर्जर बुनियाद पर टिकी है। बेसमेंट में छत से पानी टपक रहा है। दीवारों और छत का प्लास्टर गिर रहा है। कभी भी यहां कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जलभराव और पनप रहे मच्छरों से संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। दो सप्ताह पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने अस्पताल का हाल देखकर अधिकारियों को फटकार लगाई थी, लेकिन इसके बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
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उपचार से ज्यादा बीमारियों का खतरा
अस्पताल के माइनस-एक और माइनस-दो बेसमेंट में लोग जाने से डरते हैं। यहां अंधेरा और जगह-जगह छत से टपकता पानी मरीज-तीमारदार ही नहीं बल्कि अस्पताल के स्टाफ की मुसीबत का कारण बना हुआ है। जलभराव में मच्छर पनप रहे हैं। बच्चों के इस अस्पताल में उपचार से ज्यादा बीमारी का खतरा बना रहता है। बेसमेंट में रिसाव के कारण इमारत की नींव कमजोर पड़ने की आशंका जाहिर की जा रही है।
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सात साल में ही निकला इमारत का दम
मायावती के शासन काल में चाइल्ड पीजीआई और आसपास आवासीय इमारतों का निर्माण शुरू हुआ था। साल 2015 अखिलेश के शासन काल में उद्घाटन हुआ था। इमारत शुरू हुए सात साल ही हुए हैं और हालत जर्जर हो गई है। इमारत के निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप भी लगते रहे हैं। पांच मंजिला इमारत के अलावा आवासीय टावरों की दुर्दशा बाहर से ही दिखाई देती है।
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मलेरिया विभाग को कुछ नहीं दिखता
चाइल्ड पीजीआई के बेसमेंट में जलभराव और मच्छर पनपने की शिकायतें कई बार जिला मलेरिया विभाग से भी की जा चुकी हैं, लेकिन मलेरिया विभाग के अधिकारी-कर्मचारी काम से ज्यादा आराम परस्ती पर विश्वास रखते हैं। विभाग की टीम ने शिकायतों पर संज्ञान लेने की जरूरत तक नहीं समझी है, जबकि यहां इलाज के लिए पहुंचने वाले बच्चों के लिहाज से यहां बरती जा रही लापरवाही घातक साबित हो सकती है।
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‘झूठी वाहवाही से नहीं चलेगा काम’
दो सप्ताह पहले पीजीआई पहुंचे प्रमुख सचिव आलोक ने पीजीआई प्रशासन को फटकार लगाते हुए यहां तक कह दिया था कि अस्पताल प्रशासन सिर्फ दो-चार केस दिखाकर वाहवाही लूटता है, जबकि प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेज बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। यहां भर्ती से ज्यादा रेफर का चलन है। कोई शोध नहीं हो रहा है और डॉक्टर निजी प्रैक्टिस में व्यस्त हैं। दो-तीन डॉक्टरों को छोड़कर कोई काम नहीं करता। प्रमुख सचिव की नाराजगी के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं।
पहले की तुलना में जलभराव की स्थिति में सुधार हुआ है। इमारत की मरम्मत का काम बजट के अभाव में अभी शुरू नहीं हो पाया है। इस साल का बजट अभी नहीं मिला है। - डॉ. आकाश राज, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, चाइल्ड पीजीआई