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जिंदगी जीने के हौसले से कैंसर को मात दे रहे बच्चे

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नोएडा। जिंदगी जीने का हौसले से बच्चे कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी मात दे रहे हैं। चाइल्ड पीजीआई से मिले आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 से अब तक आए 390 कैंसर पीड़ित बच्चों में से 70 फीसदी तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। हालांकि, कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तरह से क्योर यानी स्वस्थ होने के बारे में 5 साल तक निगरानी करने के बाद ही कहा जा सकता है। इस अवधि में यदि शरीर में कैंसर कोशिका या कणिका नहीं मिलती है तो ही मरीज को ठीक माना जाता है। गंभीर बात यह है कि 2 से 9 साल के 80 से 90 फीसदी बच्चे रक्त कैंसर का शिकार हो रहे हैं। अधिकांश ल्यूकीमिया नामक कैंसर से पीड़ित हैं। चिकित्सकों का कहना है कि चौथी स्टेज में 50 फीसदी और तीसरे स्टेज में 70 से 80 फीसदी बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।
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बचाव के लिए खास उपाय नहीं
चाइल्ड पीजीआई की चिकित्सक ने बताया कि मुंह के कैंसर से बचाव के लिए पान-मसाला और तंबाकू आदि नहीं खाने की सलाह दी जाती है। बच्चों के कैंसर में ऐसा नहीं है। ब्लड कैंसर के लिए कुछ कहा नहीं जा सकता है। बच्चों में पनपने वाले ब्रेन कैंसर, किडनी व अन्य शारीरिक कैंसर को लेकर भी स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। हालांकि ,अच्छा खानपान, शारीरिक सक्रियता से इसकी संभावना को कम किया जा सकता है। वहीं, लक्षण दिखने पर सीटी स्कैन, एमआरआई, सोनोग्राफी जैसी जांच करानी चाहिए। कैंसर स्टेज के आधार पर ही कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी से मरीज का उपचार किया जाता है।
कैंसर पीड़ितों ने कोरोना को हराया
कैंसर पीड़ित बच्चे कोरोना की भी चपेट में आ गए। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने के बावजूद बच्चों ने कोरोना को मात दी। इनमें कासगंज निवासी 14 वर्षीय किशोरी, दिल्ली निवासी 4 वर्षीय किशोरी, किडनी के कैंसर से पीड़ित पांच वर्षीय किशोर और अन्य पीड़ित किशोर शामिल हैं। बता दें कि चाइल्ड पीजीआई में फिलहाल अलग-अलग कैंसर से पीड़ित 20 बच्चे भर्ती हैं। इनको पढ़ाने के लिए शिक्षक अस्पताल पहुंचते हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए अस्पताल में विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
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कैंसर के लक्षण
- बुखार।
- शरीर में किसी तरह की गांठ होना।
- ब्लड की कमी या विकार होना।
- नाक और मुंह से रक्त आना।
- सूजन आना।
- अन्य शारीरिक परेशानियाें का होना।
अस्पताल की टीम कैंसर पीड़ितों के उपचार में जुटी है। इनकी मदद से बच्चे तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। तीसरी और चौथी स्टेज में भी बच्चे में कैंसर क्योर होने की संभावना रहती है। लोग जागरूक होकर बच्चों का उपचार कराएं।
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- डॉ. नीता राधाकृष्णन, एचओडी, हिमेटालॉजी एंड आन्कोलॉजी विभाग, चाइल्ड पीजीआई
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