रेवाड़ी। छठ पर्व को लेकर जिले में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। रेवाड़ी, बावल और धारूहेड़ा में शाम के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, इसे संध्या अर्घ्य भी कहते हैं। उगते सूर्य को अर्घ्य देने की रीति तो कई व्रत और त्योहारों में है लेकिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा केवल छठ में ही है।
अर्घ्य देने से पहले बांस की टोकरी को फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू और पूजा के सामान से सजाया जाता है। सूर्यास्त से कुछ समय पहले सूर्य देव की पूजा होती है फिर डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देकर पांच बार परिक्रमा की जाती है।
मंगलवार को सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। जिले में करीब 80 जगह पर छठ पर्व मनाया जाएगा। छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख पर्व है लेकिन अब यह पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने लगा है।
महिलाओं से लेकर पुरुष और बच्चे सभी मिलकर व्रत, गीत और पूजा-पाठ के माध्यम से सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हैं। इस बार भीड़ अधिक बढ़ने की संभावना है।
सोलहाराही तालाब में कृत्रिम घाट बनाया
शहर में सोलहाराही तालाब में कृत्रिम घाट बनाया गया है। चार कृत्रिम घाट तैयार किए गए हैं। यहां पर करीब 10 हजार लोगों के पहुंचने की संभावना है। सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहतर प्रबंध किए गए हैं। पूर्वांचल सेवा समिति के सचिव अश्विनी कुमार, हरीश प्रसाद, राजेश श्रीवास्तव और प्रदीप ओझा ने बताया कि छठ पर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ की संभावना को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं। जल प्रबंधन, सुरक्षा, पार्किंग व्यवस्था, पंडाल सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना भी बनाई गई है। आयोजन स्थल पर विशेष स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं जो श्रद्धालुओं की मदद करेंगे। पिछले वर्ष छठ महापर्व का आयोजन अनाज मंडी मार्ग के पास खाली स्थान पर किया गया था। उस समय श्रद्धालुओं की भीड़ और सुविधाओं की कमी के चलते कई तरह की चुनौतियां सामने आई थीं। इस बार प्रशासन और समिति दोनों की ओर से बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
भगवान सूर्य की होती है आराधना
पंडित रोशन तिवारी ने बताया कि सूर्य की उपासना सभ्यता के अनेक क्रमों में देखी जा सकती है। महापर्व छठ हिंदू धर्म में एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें न केवल उदयाचल सूर्य की पूजा की जाती है बल्कि अस्ताचलगामी सूर्य को भी पूजा जाता है। मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है।
सोलहाराही तालाब में बनाया गया कृत्रिम घाट। संवाद