-रिटायर्ड शिक्षक ने दायर की है आरटीई एवं दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट के खिलाफ याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिटायर्ड शिक्षक ने राइट टू एजुकेशन (आरटीई) एक्ट और दिल्ली स्कूल एजुकेशन रूल्स की उन धाराओं को चुनौती दी है, जो स्कूल शिक्षकों को निजी ट्यूशन या निजी शिक्षण गतिविधियों में शामिल होने से रोकती हैं।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने याचिका पर तीखी बहस सुनी। याचिकाकर्ता दिल्ली पब्लिक स्कूल के पूर्व शिक्षक प्रेम प्रकाश धवन हैं। पीठ ने प्रथम दृष्टया याचिका से सहमति जताने में अनिच्छा दिखाई और पूछा कि सेवा काल में उन्होंने अदालत का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह तथ्य कि उन्होंने सेवा में रहते अदालत आने की हिम्मत नहीं दिखाई, संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि वह इसलिए नहीं आए क्योंकि इससे उनकी सेवा और वेतन प्रभावित होता।
कौन सा कानून निजी ट्यूशन पर लगाता है रोक
याचिका में आरटीई एक्ट की धारा 28 और दिल्ली स्कूल एजुकेशन रूल्स, 1973 की नियम 113 तथा 123(1)(a)(viii) को चुनौती दी गई है। धारा 28 कहती है कि कोई शिक्षक निजी ट्यूशन या निजी शिक्षण गतिविधि में संलग्न नहीं होगा। नियम 113 में कहा गया है कि कोई शिक्षक निजी ट्यूशन या निजी रोजगार नहीं लेगा या किसी व्यवसाय में संलग्न नहीं होगा। नियम 123(1)(a)(viii) में कोई शिक्षक स्कूल के अलावा किसी स्रोत से पारिश्रमिक वाली नौकरी स्वीकार नहीं करेगा या निजी ट्यूशन नहीं देगा।