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Noida News: फिल्म 120 बहादुर के प्रमाणन और रिलीज को हाईकोर्ट में चुनौती

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-फिल्म में 13 कुमाऊं रेजीमेंट की सी कंपनी की लड़ाई के गलत चित्रण का आरोप
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फिल्म 120 बहादुर के प्रमाणन और प्रस्तावित रिलीज को चुनौती देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म 18 नवंबर 1962 को चीन-भारत युद्ध के दौरान लड़ी गई रेजांगला की ऐतिहासिक लड़ाई के सत्य को विकृत रूप में पेश करती है। याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी।
याचिका के अनुसार लद्दाख के चुशूल सेक्टर में 18,000 फीट की ऊंचाई पर लड़ी गई इस लड़ाई में 13 कुमाऊं रेजिमेंट की सी कंपनी के 120 सैनिकों में से 114 ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। याचिकाकर्ताओं ने रक्षा मंत्रालय के 1992 के आधिकारिक रिकाॅर्ड का हवाला देते हुए कहा है कि यह युद्ध सामूहिक वीरता का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि कंपनी के अधिकांश सैनिक रेवाड़ी क्षेत्र के अहीर (यादव) समुदाय से थे। याचिका संयुक्त अहीर रेजीमेंट मोर्चा और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई है जिसमें अदालत से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा गया है कि यह मामला सामूहिक सम्मान, ऐतिहासिक सत्य और रेजीमेंट की गरिमा के संरक्षण से जुड़ा है।
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याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप है कि फिल्म में मेजर शैतान सिंह, पीवीसी को एकमात्र नायक के रूप में दिखाया गया है और उनका नाम बदलकर भाटी कर दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म का यह चित्रण सिनेमैटोग्राफ एक्ट और उसके दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। इनमें इतिहास को विकृत रूप में प्रस्तुत करने पर रोक है। साथ ही भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 का भी उल्लेख किया गया है जो मृत व्यक्तियों के बारे में आपत्तिजनक आरोप लगाने पर रोक लगाती है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि फिल्म को दिया गया प्रमाणपत्र रद्द किया जाए और फिल्म का नाम बदलकर 120 वीर अहीर किया जाए।
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