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कैमरे के सामने हो केंद्र सरकार की आंदोलनकारी किसानों से बैठक : वीएम सिंह

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दिल्ली प्रेस क्लब में एमएसपी गांरटी किसान मोर्चा के राज्य संयोजकों के साथ बैठक में रणनीति बनी
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राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा - इससे किसानों व किसान नेताओं को सरकार की नीयत पर भरोसा हो सकेगासंवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गारंटी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह का कहना है कि 19 मार्च को पंजाब के आंदोलनरत किसानों के साथ केंद्र सरकार की प्रस्तावित बैठक कैमरे के सामने हो, जिससे देशभर के किसानों और किसान नेताओं को सरकार की नीयत पर भरोसा हो सके। इससे लोग समझ सकेंगे कि कौन सही और कौन गलत है। वीएम सिंह मंगलवार को प्रेस क्लब में एमएसपी गारंटी किसान मोर्चा की बैठक के बाद मीडिया से बात कर थे। इसमें मोर्चा के अलग-अलग राज्यों के संयोजक मौजूद रहे।

वीएम सिंह ने बताया कि फरवरी 2024 में पंजाब में एमएसपी गारंटी की मांग को लेकर नया आंदोलन हुआ है। 12 जनवरी 2024 को चंडीगढ़ में आंदोलनकारी 8 नेताओं ने एमएसपी-जीकेएम के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और समर्थन की बात कही। इसके बाद सरकार ने 14 व 22 फरवरी को एमएसपी को लेकर बातचीत की। इसमें केंद्रीय मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया था और 19 मार्च को अगली बैठक तय की गई। यह बैठक कैमरे के सामने होनी चाहिए, ताकि देश के किसान और नेता सरकार की नीयत को समझ सकें। यह समझ से परे है कि सरकार एमएसपी देने से क्यों कतरा रही है, जबकि उद्योगपतियों को गारंटी दे दी गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब चीनी की कीमत 2400-2500 रुपये प्रति कुंतल थी, तब सरकार ने गारंटी दी थी। उन्होंने कहा कि चार साल से एमएसपी का मसला लटका पड़ा है। सरकार ने अगर मन बना लिया है कि मुद्दे का लटकाए रखना है तो इस रूप में मोर्चा का मानना है कि केंद्र सरकार जब तक चाहे, विचार करे, लेकिन राज्य सरकारों को एमएसपी गारंटी का अधिकार दे। मोर्चा ने केंद्र सरकार के इस दावे को खारिज किया है कि एमएसपी पर खरीद से उसको अपने बजट से ज्यादा राशि देनी पड़ेगी।
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एमएसपी का मुद्दा 2000 से अनसुलझा

वीएम सिंह ने बताया कि एमएसपी का मुद्दा पहली बार 20 अक्तूबर 2000 को पीलीभीत से शुरू हुआ। किसानों ने रेल और सड़क यातायात पूरी तरह ठप कर दिया था, जिससे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यूपी का मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह को बनाया। इसके बाद यूपी में एमएसपी पर सरकारी खरीद शुरू हुई। हाईकोर्ट (वीएम सिंह बनाम भारत सरकार, 5112 ऑफ 2000) के आदेश के बाद यूपी में धान की खरीद की मॉनिटरिंग शुरू हुई और सरकारी खरीद को पारदर्शी बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करने का निर्देश दिया। यूपी सरकार ने 20 वर्षों तक खरीद जारी रखी, लेकिन कोरोना काल में सरकार ने कोर्ट को गुमराह कर यह दावा किया कि अब एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित हो गई है, जिससे मामला खत्म कर दिया गया।



दिल्ली आंदोलन और एमएसपी की मांग

वीएम सिंह ने बताया कि 25-26 नवंबर 2020 को दिल्ली में हुए किसान आंदोलन की घोषणा 9 अगस्त 2020 को की गई थी। 30 सितंबर 2020 को सरकार के बुलावे पर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। इस बैठक में राजू शेट्टी की ओर से 2018 में संसद में पेश किए गए एमएसपी गारंटी बिल की कॉपी मंत्रियों को दी व् इसे लागू करने की मांग की। वीएम सिंह ने कहा कि आज हर किसान नेता एमएसपी की गारंटी की बात कर रहा है, जबकि 2020 में कुछ लोग इस मांग को नजरअंदाज कर रहे थे।

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महाकुंभ में शंकराचार्यों से मुलाकात

किसान नेताओं ने हाल ही में महाकुंभ में एमएसपी गारंटी की मांग को लेकर तीनों शंकराचार्यों से मुलाकात की। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद और पुरी मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने भी इस मांग पर सहमति जताई और सरकार से समाधान निकालने का आग्रह किया। बैठक में यह भी चिंता जताई गई कि विदेशों में नौकरी करने गए कई किसान परिवारों के बच्चे अब लौट रहे हैं। यदि इन्हें जीविका के साधन नहीं मिले तो अपराध की ओर जाने की आशंका बनी रहेगी।
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यह नेता रहे बैठक में मौजूद

बैठक में यूपी से वीएम सिंह के अलावा बलराज भाटी, रोहित जाखड़, महाराष्ट्र से राजू शेट्टी, केरल से पीवी राजगोपाल, तमिलनाडु से गुरुस्वामी, बिहार से छोटेलाल श्रीवास्तव, उत्तराखंड से भोपाल चौधरी, हिमाचल प्रदेश से संजय सिंह, हरियाणा से जगबीर सिंह, पंजाब से जसकरण सिंह, मध्यप्रदेश से केदार सिरोही, शिलांग से कमांडर शांगपलियांग, जम्मू-कश्मीर से यावर मीर, छत्तीसगढ़ से राजाराम त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। वहीं, पीवी राजगोपाल, गुरुस्वामी, यावर मीर, कमांडर शांगपलियांग और राजाराम त्रिपाठी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े, जबकि जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने अपने प्रतिनिधि मेजर हिमांशु के जरिये भाग लिया।
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