-सीबीआई कोर्ट ने सुनाई सजा, सॉफ्टवेयर इंजीनियर की गोली मारकर कर दी थी हत्या
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। दिल्ली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को नोएडा के चर्चित अंकित चौहान हत्याकांड में दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी शशांक जादौन और मनोज कुमार को दोषी पाते हुए क्रमशः 70 हजार रुपये और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोनों दोषियों को 20 सितंबर 2025 को दोषी करार दिया गया था।
मूलरूप से मेरठ निवासी अंकित चौहान सेक्टर-62 स्थित सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। उनकी पत्नी अमीषा सेक्टर-135 स्थित आईटी कंपनी एसेंचर में कार्यरत थीं। 13 अप्रैल 2015 को अंकित पत्नी से मुलाकात कर दोस्त गगन दुधौरिया संग फॉर्च्यूनर कार से सेक्टर-76 स्थित घर लौट रहे थे। बरौला बाईपास के पास कार सवार हमलावरों ने उन्हें ओवरटेक कर रोक लिया और अंकित पर ताबड़तोड़ गोलियां दाग दीं थी। अंकित की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आरोपी फरार हो गए। मामले में सेक्टर 49 नोएडा कोतवाली में केस दर्ज किया गया था। मामला गंभीर प्रकृति का होने के कारण पीड़ित परिवार ने न्यायालय का रुख किया। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी। सीबीआई ने 14 जून 2016 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। सीबीआई ने 29 अगस्त 2017 को दोनों दोषियों के विरुद्ध हत्या, डकैती का प्रयास, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की थी। प्रारंभिक रूप से यह मुकदमा गाजियाबाद की अदालत में चल रहा था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2 अगस्त 2019 को निष्पक्ष सुनवाई के लिए केस को नई दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था।
करीब 10 वर्षों तक चले इस मुकदमे में सीबीआई ने ठोस साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अभियोजन पक्ष का पक्ष मजबूती से रखा। अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
टैटू और कार नंबर के जरिए आरोपी तक पहुंची थी एसटीएफ नोएडा: करीब 25 महीने तक नोएडा पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई को छकाने वाला मुख्य आरोपी शशांक हाथ पर बने टैटू और संदिग्ध वाहन नंबर की वजह से पकड़ा गया था। एसटीएफ नोएडा की जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी शशांक जादौन बीटेक इंजीनियर था और रियल एस्टेट ब्रोकेज का काम करता था। आर्थिक मंदी में भारी नुकसान होने पर उसने अपराध की राह पकड़ी थी। उसकी मुलाकात पंकज नामक युवक से हुई, जिसने सुझाव दिया कि फॉर्च्यूनर कार लूटकर मोटी रकम हासिल की जा सकती है। सीबीआई ने सुराग देने वाले को पांच लाख का इनाम भी घोषित किया था। जांच में सामने आया था कि शशांक, कुख्यात अनिल दुजाना के गुर्गे सतेंद्र उर्फ सत्ते के संपर्क में था। उसी ने शशांक को कार लूटने की योजना सुझाई थी। वारदात से पहले और बाद में आरोपियों ने शराब पार्टी की थी। हत्या में प्रयुक्त पिस्टल पंकज की लाइसेंसी थी, जिसे बाद में गाजियाबाद के बाबा गन हाउस में बेच दिया गया।