एक से पांच साल के बच्चे होते हैं ज्यादा चंचल, अक्सर बालकनी से कूदने का करते हैं प्रयास
30 से 50% बच्चे पहुंचते हैं अस्पताल, सिर पर चोट से तोड़ देते हैं दम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अभिभावकों की लापरवाही नन्हे बच्चों की जिंदगी छीन रही है। एम्स ट्रामा सेंटर के आंकड़े बताते हैं कि ऊंचाई से गिरकर गंभीर रूप से घायल होने वाले तीन में से एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो जाती है। वहीं, ठीक होने वाले बच्चे भी जिंदगीभर के लिए दिव्यांग बन सकते हैं। ऐसे बच्चों को बार मिर्गी के दौरे व बार-बार सर्जरी करने की जरूरत सहित अन्य विकारों की संभावना रहती है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में 30 से 50 फीसदी बच्चे सिर में चोट के कारण दम तोड़ देते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसी समस्या से बचने के लिए एम्स ट्रामा सेंटर ने सुरक्षित बालकनी अभियान शुरू किया था। इसके तहत पीड़ित माता-पिता को जागरूक किया जाता है। साथ ही, उन्हें 10 परिवारों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके बावजूद बच्चों के गिरने के मामलों में ज्यादा अंतर नहीं है। इसकी रोकथाम के लिए बृहस्पतिवार को एम्स ट्रामा सेंटर में कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें कैलाश सत्यार्थी ने अपनी बात रखी। साथ ही, आश्वासन दिया कि वे एम्स की मुहिम को आगे बढ़ाएंगे। वहीं, एम्स ट्रामा सेंटर के न्यूरोसर्जन डॉ. दीपक अग्रवाल ने बताया कि साल 2018 में 680 मामले ऊंचाई से गिरने के आए थे जिनमें नवजात से लेकर 11 साल तक के 13 बच्चाें ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। साल 2023 में मरीजों का आंकड़ा 757 का रहा और 10 बच्चों की मृत्यु हो गई। छह साल में कुल 151 बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि इन्हें बचाया जा सकता था। एक से पांच साल के बच्चे ज्यादा चंचल होते हैं। यह अक्सर ऊंचाई से कूदने का प्रयास करते हैं। इन बच्चों के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। अभिभावकों की लापरवाही के कारण यह ऊंचाई से गिर जाते हैं।
इनका विशेष ध्यान रखें
एम्स ट्रामा सेंटर के डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि बच्चों में ऊंचाई से गिरने के मामले सबसे ज्यादा होते हैं। इनकी रोकथाम के लिए बालकनी की रेलिंग को एक मीटर से ऊपर होना चाहिए, रेलिंग सीढ़ीनुमा न हो, बालकनी में कोई फर्नीचर न हो। बालकनी खेलने की जगह नहीं है, इसलिए मासूमों को वहां अकेला न छोड़ें।
शनिवार को जुटेंगे विशेषज्ञ
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अजय चौधरी ने बताया कि रोजाना 4 से 5 बच्चे ऊपर से गिरकर अस्पताल में आते हैं। ऐसे बच्चों के इलाज के लिए, नई तकनीक व अन्य उपायों पर मंथन के लिए एम्स ट्रामा सेंटर में शनिवार को देशभर के विशेषज्ञ जुटेंगे।