बीमा कंपनी को 30 दिन में क्लेम देने का आयोग ने दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। दुर्घटना के कारण पैर में विकलांगता आई है और उसे बीमारी बताकर बीमा कंपनी क्लेम देने से इंकार नहीं कर सकती है। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को क्लेम राशि का 30 दिन में भुगतान करने का आदेश दिया है। 10 हजार रुपये मानसिक संताप के भी देने होंगे।
ककोड़ निवासी सोनू सिंह ने निशान रिनाॅल्ट फाइनेंस सर्विस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से लोन कराया था। फाइनेंस कंपनी ने एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से पेमेंट प्रोटेक्ट इंश्योरेंस कराया, जिसमें उनके विकलांग होने या मृत्यु होने पर लोन धनराशि का भुगतान उनके परिवार से जमा नहीं कराना होगा। विकलांग या मृत्यु होने पर लोन की समस्त धनराशि का क्लेम उनके या उनके परिवार को मिलना था। 2 दिसंबर 2018 को अचानक मोटर साइकिल गिरने से दायां पैर घुटने के पास से टूट गया। शारदा अस्पताल में इलाज कराया और 20 दिन बाद घर भेजा गया। 5 नवंबर 2019 को जिम्स में भर्ती किया और ऑपरेशन हुआ। इसके बाद भी ठीक न हो सका तो मुख्य चिकित्साधिकारी ने 40 फीसदी विकलांगता प्रमाणपत्र जारी कर दिया। बीमा कंपनी और फाइनेंस कंपनी से संपर्क करके पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक क्लेम देने के लिए दावा किया। बीमा कंपनी ने सुनवाई नहीं की। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर, सदस्य दया शंकर पांडेय व सदस्या अंजू शर्मा ने सुनवाई की। आयोग ने माना कि दुर्घटना के कारण पैर में चोट आने से विकलांगता आई है। क्लेम के दावे को निरस्त नहीं किया जा सकता है। आयोग ने बीमा कंपनी को क्लेम राशि 2.71 लाख रुपये का भुगतान 6 फीसदी ब्याज समेत देने का आदेश दिया है। 10 हजार रुपये मानसिक संताप और 1 हजार रुपये वाद व्यय के भी देने होंगे।