नागरिकता कानून : चार को 22 घंटे किया नजरबंद, ढूंढ़ते रहे समर्थक
ग्रेटर नोएडा। नागरिकता कानून के समर्थन और बलवाइयों पर देशद्रोह में केस दर्ज करने की मांग के लिए प्रदर्शन करने की घोषणा करने पर पुलिस ने चार लोगों को नजरबंद कर दिया। राजपूत उत्थान सभा के प्रदेशाध्यक्ष धीरज सिंह और उनके साथियों को शनिवार रात बीटा-2 थाने में काटनी पड़ी। विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता उन्हें ढूंढते रहे, लेकिन पुलिस ने उन्हें समझा बुझाकर वापस भेज दिया। पुलिस ने चारों को रविवार शाम 22 घंटे बाद पांच लाख का मुचलका भरवाकर छोड़ दिया।
प्रदेश भर में हाई अलर्ट है और धारा-144 लागू की गई है। ऐसे में किसी भी प्रदर्शन आदि पर रोक लगी हुई है। पड़ोसी जिलों में बवाल के बावजूद जिले ने शांति की मिसाल पेश की है। पुलिस लोगों को जगह-जगह जाकर नागरिकता कानून पर जागरूक व समझाने का काम कर रही है। ऐसे में राजपूत उत्थान सभा के प्रदेशाध्यक्ष धीरज सिंह ने शनिवार को घोषणा की थी कि वह रविवार सुबह परी चौक पर नागरिकता कानून के समर्थन और बलवा करने वालों पर देशद्रोह का केस दर्ज करने की मांग के लिए प्रदर्शन करेंगे। इसकी सूचना मिलते ही खुफिया विभाग और पुलिस अलर्ट हो गई। पुलिस शनिवार रात ही उन्हें डेल्टा-1 स्थित उनके आवास के पास से नजरबंद कर बीटा-2 थाने ले आई। पुलिस ने उनके तीन अन्य साथियों को भी नजरबंद कर दिया।
वहीं, परी चौक व सिटी पार्क के पास रविवार सुबह किसी भी प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। धीरज सिंह का मोबाइल रविवार सुबह स्विच ऑफ था। इस कारण उनके समर्थक उन्हें ढूंढते रहे। पुलिस के हिरासत में लेने की आशंका पर वह बीटा-2 थाने और परी चौक पुलिस चौकी पर भी पहुंचे। यहां पुलिस ने उन्हें समझाबुझाकर प्रदर्शन करने से रोका और वापस भेज दिया। रविवार शाम पुलिस के छोड़ने के बाद धीरज सिंह ने बताया कि पुलिस ने उन्हें, ललित सिंह सहित चार को शनिवार रात लगभग साढ़े 8 बजे नजरबंद कर बीटा-2 थाने में रखा था और पांच लाख का मुचलका भरवाकर रविवार शाम छोड़ा है।
जिले में धारा-144 लागू है। किसी को भी धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए एहतियातन धीरज सिंह व उनके साथियों को नजरबंद किया गया था। शाम को सभी को छोड़ दिया गया है।
- तनु उपाध्याय, सीओ ग्रेटर नोएडा प्रथम