तालमेल से संभाल रहे परिवार
सीए विशाल और कृति त्रिपाठी दोनों इस पेशे से जुड़े हैं। उनका कहना है कि व्यस्तता के बावजूद परिवार उनकी पहली प्राथमिकता है। वे घर और कार्यालय की जिम्मेदारियां आपसी तालमेल से निभाते हैं। ऑडिट और टैक्स सीजन में भी परिवार के लिए समय निकालने का प्रयास करते हैं। उनका मानना है कि पेशेवर सफलता तभी सार्थक है, जब परिवार का साथ और खुशियां भी बनी रहें।
ऑफिस से घर लौटकर बेटी की जिम्मेदारी
सीए साक्षी अग्रवाल बताती हैं कि उनकी चार वर्ष की बेटी है और उनके पति भी सीए हैं। सुबह बेटी को स्कूल छोड़ने के बाद वे कार्यालय पहुंचती हैं। घर में उस समय देखभाल करने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं होने के कारण उन्हें काम के बीच घर लौटकर बेटी को स्कूल से लाना पड़ता है। इसके बाद वे दोबारा कार्यालय और घर, दोनों की जिम्मेदारियां संभालती हैं। उनके लिए परिवार और पेशा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
परिवार केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं
सीए अनिल अग्रवाल का मानना है कि बदलते समय में परिवार की जिम्मेदारी केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रह गई है। वे बच्चों के साथ समय बिताने, अभिभावकों की देखभाल और घरेलू कार्यों में भी बराबर की भागीदारी निभाते हैं। उनका कहना है कि परिवार के साथ बिताया गया समय मानसिक तनाव को कम करता है और काम करने की नई ऊर्जा देता है।
स्टार्टअप्स ने बढ़ाई सीए की अहमियत
सीए आशा शर्मा बताती हैं कि पहले यह पेशा मुख्य रूप से पुरुषों का माना जाता था, लेकिन अब महिलाएं भी इसमें बराबरी से अपनी पहचान बना रही हैं। शहर में तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों ने सीए की भूमिका को पहले से अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। उनके पति भी सीए हैं, इसलिए वे पेशे की चुनौतियों को अच्छी तरह समझते हैं और हर कदम पर सहयोग करते हैं।
डिजिटल सिस्टम से बढ़ी कार्यक्षमता
सीए अनीता कहती हैं, तकनीक और डिजिटल सिस्टम ने काम को पहले की तुलना में आसान बनाया है, लेकिन जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। ऐसे में समय का सही प्रबंधन और कार्यों की प्राथमिकता तय करना बेहद जरूरी हो गया है। वे व्यस्त दिनचर्या के बावजूद परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने का प्रयास करती हैं, ताकि रिश्तों की मजबूती बनी रहे।