शालिनी बृजभूषण सिंह की इकलौती बेटी हैं। उन्होंने पांच किताबें भी लिखी हैं। उनके पति भाजपा नेता हैं। भाई की जीत पर भी शालिनी ने कविता पढ़ी। शालिनी ने छोटे भाई करण भूषण सिंह की लोकसभा चुनाव में जीत का जिक्र किया। कहा- जीत के बाद भाई की एक तस्वीर थी, जिसमें वह चौखट पर मां को गले लगा रहे थे। फिर उन्होंने एक भाई के लिए कविता पढ़ी-
रणभूमि से लौटकर मां जब मैं तेरे गले लगा, वेदनाएं निष्क्रिय हुईं सब, हर घाव मध्यम लगा। जो हार भी जाता तब भी ऐसे ही गले लगती मां, आंसू खुशी के देखते थे तो जीत कर मैं आया मां। भाग्य के ललाट पर कर्म का तिलक लगा सकता हूं, तेरे लिए मैं हर युद्ध जीत कर आ सकता हूं।
कवियों के सम्मान में भी पंक्तियां पढ़ी-
किसी चाकू, किसी खंजर, किसी तलवार से नहीं मारूंगा, यह वादा है मेरा, तेरी तरह पीठ पर वार से नहीं मारूंगा। अभी देख रहा हूं, तुझ में खुदगर्जी कितनी बाकी है। जब मैं मारने पर आऊंगा, किसी हथियार से नहीं मारूंगा। मार दूंगा शब्दों से, तो झेल न पाएगा बाण मेरा; लेखक हूं मैं, कलम के अलावा किसी और औजार से नहीं मारूंगा।
इसके साथ ही कई और रचनाएं पेश कीं
एक सल्तनत है लफ्जों की, हम दिखावा नहीं करते।
हम लिख देते हैं इतिहास, हम दावा नहीं करते।
हमने स्याह हरफो छू ली है रूह अपनी, हम मंदिर-मस्जिद, काशी-काबा नहीं करते।
हम आएंगे तूफान बनकर-स्वागत की तैयारी रखना, धधकता विजय-घोष रखना, राजतिलक की थाली रखना।
सास-ससुर हैं बिहार के पूर्व सांसद, नोएडा में पति के साथ रहती हैं
पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने शालिनी सिंह की शादी आरा से पूर्व सांसद स्व. अजीत सिंह और पूर्व सांसद मीना सिंह के इकलौते पुत्र विशाल सिंह से की है। विशाल सिंह बिहार के आरा के रहने वाले हैं, लेकिन वर्तमान में नोएडा में रहते हैं। वह भी भाजपा नेता हैं। वह राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) के चेयरमैन भी हैं।