लाखों पौधे लगाने के बाद भी नोएडा में सांस लेना दूभर
उचित देखभाल और सुरक्षा न मिलने से आधे से ज्यादा पौधे सूख जाते हैं
-इस साल वन विभाग की ओर से 93330 और अन्य विभागों की ओर से 922436 पौधे लगाए गए
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। हाईटेक सिटी के रूप में अपनी पहचान बना चुके नोएडा में ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें और चमचमाते कॉरपोरेट दफ्तर जितनी तेजी से खड़े हो रहे हैं, उतनी ही रफ्तार से यहां का प्रदूषण भी बढ़ रहा है। कंक्रीट के जंगलों के बीच हर साल सरकारी कागजों में हरियाली का ग्राफ तो ऊंचा किया जाता है, लेकिन देखरेख के अभाव में जमीन पर लगाए गए पौधे भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं। ऐसे में लाखों पौधे लगाने के बावजूद नोएडा और ग्रेटर नोएडा की आबोहवा में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। सर्दियों की शुरुआत होते ही पूरा जिला बेहद खराब या गंभीर श्रेणी के स्मॉग की चपेट में आ जाता है।
उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष पौधरोपण महाअभियान के तहत इन दिनों गौतमबुद्ध नगर में एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत बड़े स्तर पर पौधे लगाए जा रहे हैं। हर साल मानसून में प्रशासन अपना निर्धारित टारगेट तो पूरा कर लेता है, लेकिन असली समस्या इसके बाद शुरू होती है। प्रशासन मानसून में पौधे लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, लेकिन इसके बाद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट और मुख्य सड़कों के किनारे लगे पौधों का सर्वाइवल रेट बेहद कम है। उचित देखभाल और सुरक्षा न मिलने के कारण आधे से ज्यादा पौधे अगली बरसात आने से पहले ही सूख जाते हैं या आवारा मवेशियों का शिकार हो जाते हैं।
नोएडा के एक्सप्रेसवे और जगह-जगह चल रही कंस्ट्रक्शन साइट्स से भारी मात्रा में धूल उड़ती है। यह धूल छोटे और नए पौधों के पत्तों पर जम जाती है, जिससे उनके छिद्र ब्लॉक हो जाते हैं। पत्तों पर धूल की मोटी परत जमने के कारण पौधे प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाते और बड़े होने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
कंक्रीट का बढ़ता जाल और भारी धूल
नोएडा में एक तरफ पौधे लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ निर्माण कार्य के चलते हजारों पेड़ों की बलि दी गई है। बड़े पेड़ों की जगह छोटे-छोटे पौधे ले रहे हैं, जो हवा से पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसी खतरनाक बारीक धूल को तुरंत सोखने में सक्षम नहीं होते। इसके अलावा कॉरपोरेट हब होने के कारण सड़कों पर गाड़ियों का बढ़ता दबाव प्रदूषण को लगातार बढ़ा रहा है।
पीपल, बरगद, नीम लगाने पर दिया जाए जोर
एक्यूआई सुधारने के लिए पीपल, बरगद, नीम, जामुन और पिलखन के पेड़ लगाने होंगे जो 24 घंटे ऑक्सीजन देते हैं। इसके साथ ही, जब तक कंस्ट्रक्शन साइट से उड़ने वाली धूल और सड़कों की सफाई पूरी तरह से नहीं होगी, तब तक केवल पौधे लगाने से हवा साफ नहीं होगी।
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चार साल में लगाए गए पौधे
साल - वन विभाग - अन्य विभाग - कुल पौधे
2023-24 - 182325 - 1429377 - 1611702
2024-25 - 234394 - 1038029 - 1272423
2025-26 - 244910 - 1055574 - 1300484
2026-27 - 93330 - 922436 - 1015766
कोट
जिले में हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है और यहां दिन पर दिन हरियाली बढ़ रही है, लेकिन हवा की कोई निश्चित सीमा या सीमित क्षेत्र नहीं होता है। यदि हरियाणा में प्रदूषण बढा है और हवा चल रही है तो नोएडा में भी प्रदूषण बढ़ जाएगा।
रजनीकांत मित्तल, डीएफओ, गौतमबुद्ध नगर