नोएडा। कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस भी जिले में तेजी से पांव पसार रहा है। बुधवार तक ब्लैक फंगस के 15 मामले थे जो बृहस्पतिवार को बढ़कर 21 हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी इसकी पुष्टि की है। इस रोग ने स्वास्थ्य विभाग की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बीमारी के लिए जरूरी दवाओं और इंजेक्शन का संकट होने से परेशानी बढ़ गई है। इससे निपटने के लिए जिम्स में इंतजाम किए जा रहे हैं। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है। जिले को अब तक ब्लैक फंगस का इलाज करने के लिए 6 एम्फोटेरिशन बी 50 इंजेक्शन ही प्राप्त हुए है, जबकि एक मरीज के इलाज में ही 7 इंजेक्शन तक इस्तेमाल हो सकते है।
ऐसे में मरीजों का इलाज बड़ी चुनौती है। निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन बाजार से यह इंजेक्शन खरीदने के लिए भटक रहे हैं, लेकिन जिले के मेडिकल स्टोर एवं ई-कॉमर्स साइट पर भी यह इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं। यदि समय से यह इंजेक्शन जिले को नहीं प्राप्त हुए तो मरीजों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि जिले में अब तक 21 रोगियों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। इसके इलाज के लिए जिम्स में व्यवस्था की जा रही है। शासन से दवाओं की मांग की गई है। जल्द ही आवश्यकतानुसार दवाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।
यह होता है ब्लैक फंगस
ब्लैक फंगस एक ऐसा फंगल इंफेक्शन है जो इन दिनों कोरोना वायरस से संक्रमित रहे लोगों को चपेट में ले रहा है। आमतौर पर यह इंफेक्शन नाक से शुरू होता है, जो धीरे-धीरे आंखों तक फैलता है। आंखों में लालपन या दर्द, बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी में खून, आंखों की रोशनी कम होना या आंखों में दर्द होना,गाल और आंखों में सूजन, दांत दर्द या दांतों का कमजोर होना, नाक में काली पपड़ी बनना। ब्लैक फंगस के लक्षण एवं इलाज से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए आम लोग कोविड कमांड सेंटर की सहायता ले सकते हैं। जिला प्रशासन के अनुसार 18004192211 हेल्पलाइन द्वारा कोविड एवं पोस्ट कोविड समस्याओं से जुड़े हजारों सवालों का जवाब प्रतिदिन दिया जा रहा है। जिले के अस्पतालों में भर्ती 5161 मरीजों के डिस्चार्ज होने से पहले उनमें ब्लैक फंगस की जांच होगी। मरीजों में नाक की स्थिति देखी जाएगी। यदि ब्लैक फंगस का कोई लक्षण दिखता तो तुरंत संबंधित एंटी फंगल की जांच कराकर इलाज शुरू किया जाएगा।
दवा के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित
ब्लैक फंगस की दवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए मंडल स्तर पर तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। इसमें मेरठ मंडल कमिश्नर, अपर निदेशक स्वास्थ्य और एक मेडिकल कॉलेज के प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। टीम के सत्यापन के जरिये ही जिले के मरीजों को दवा उपलब्ध होगी। सीएमओ कार्यालय के स्टोर प्रभारी डॉ .संजीव मांगलिक ने बताया कि अभी तक ब्लैक फंगस की कोई दवा नहीं मिली है। जैसे ही जिले को दवाएं मिलेंगी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, नोएडा निवासी रामकुमार तंवर ने बताया कि उनके मौसा अस्पताल में भर्ती है। उनके इलाज के लिए इंजेक्शन नहीं मिल रहा है।
कोविड व नॉन कोविड मरीजों के अलग वार्ड बनाने की तैयारी
सामान्य और कोरोना मरीजों को हो रहे ब्लैक फंगस से इलाज के लिए अलग-अलग वार्ड बनाने पर विचार चल रहा है। इसे लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी सभी अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ ऑनलाइन संवाद करेंगे। इसमें ब्लैक फंगस के कारणों और उनको रोकने के उपाय पर भी चर्चा की जाएगी।
दरअसल, ब्लैक फंगस इस समय कोरोना संक्रमितों और सामान्य लोगों दोनों कोे चपेट में ले रहा है। ऐसे में एक साथ इलाज करना मुश्किल हो रहा है। इस समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टरों की ओर से सुझाव आ रहे हैं कि कोविड व नॉन कोविड मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड बनाकर इलाज किया जाए। इससे दोनों को बेहतर इलाज दिया जा सकेगा। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि स्टेरॉयड का अधिक प्रयोग करने से ब्लैक फंगस ज्यादा हो रहा है। जिलाधिकारी ने बताया कि कुछ अस्पताल मरीजों के तीमारदारों को ब्लैक फंगस की दवा लाने के लिए कह रहे हैं, जबकि यह सीधे किसी भी व्यक्ति को नहीं मिल सकती। दवा अभी पर्याप्त मात्रा में नहीं है, इसलिए मंडलायुक्त के माध्यम से ही इसे लाया जा सकेगा।