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Noida News: बिरसा मुंडा ने जंगल, जल और जमीन के लिए अंग्रेजों से लिया था लोहा

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मुरादाबाद। झारखंड में जन्मे बिरसा मुंडा ने जंगल, जल और जमीन को बचाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। अंग्रेजों ने उनको दो साल तक जेल में रखा लेकिन जेल से बाहर निकलने पर भी उन्होंने संघर्ष जारी रखा। भाजपा ऐसे महान व्यक्ति की जयंती जनजातीय शौर्य दिवस के रूप में मना रही है। भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला ने बुद्धि विहार स्थित कार्यालय में आबा बिरसा मुंडा की जयंती कार्यालय पर मनाई। इस दौरान प्रदेश सरकार में पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सूर्यप्रकाश पाल ने कहा कि बिरसा मुंडा भगवान एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे।
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ब्रिटिश शासन के खिलाफ मुंडा जनजाति के विद्रोह का नेतृत्व उन्होंने किया था। इसी वजह से उस धरती को आबा के नाम से जाना जाता है। बिरसा मुंडा ने आदिवासी भूमि अधिकारों, संस्कृतिक पहचान के लिए संघर्ष किया। 15 नवंबर 1875 में झारखंड के उलिहातू ग्राम में साधारण परिवार में बिरसा मुंडा ने जन्म लिया था।
अपने समुदाय पर हो रहे ब्रिटिश सरकार के शोषण और उनकी जमीनें छीने जाने को बचपन से देखा था। महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला से कहा कि आबा बिरसा मुंडा ने हमें संदेश दिया कि अपनी पहचान और अपने अधिकारों के लिए खुद खड़ा होना चाहिए। विरासत हमारे समाज की ताकत है।
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बैठक का संचालन जिला महामंत्री चंद्रपाल ने किया। इस दौरान दिनेश शीर्षवाल, कार्यक्रम संयोजक विशाल त्यागी, सह संयोजक सुनीता शर्मा, क्षेत्रीय मीडिया सहप्रभारी निमित जयसवाल, महानगर मीडिया प्रभारी राजीव गुप्ता, नवदीप टंडन, हेमराज सैनी, राहुल शर्मा शम्मी भटनागर, चन्द्र प्रजापति युवा मोर्चा अध्यक्ष अभिषेक चौबे आदि मौजूद थे।
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