फर्जी तरीके से लिया 1.22 करोड़ के आईटीसी का लाभ
-जीएसटी विभाग ने पकड़ा दादरी की कंपनी का फर्जीवाड़ा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दादरी की एक फर्म आरपी ट्रेडर्स के फर्जी तरीके से 1.22 करोड़ की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने का खुलासा हुआ है। राज्य कर के अपर आयुक्त नोएडा जोन की ओर से किए गए सर्वे में अलग-अलग वर्षों में 6.8 करोड़ की बोगस फर्म के माध्यम से आपूर्ति की बात सामने आई है। इन्हीं बोगस फर्म को आधार बनाते हुए कंपनी ने आईटीसी का लाभ लिया गया।
अपर आयुक्त विवेक आर्या के नेतृत्व में आयरन डस्ट की खरीद-बिक्री करने वाले इस फर्म की जांच की गई। डाटा विश्लेषण में पाया गया कि फर्म की ओर से मई में बिना किसी कर का भुगतान किए बिना 42.31 लाख की आईटीसी जीएसटीआर-1 द्वारा पासआन कर दी गई। इसी प्रकार यह भी पाया गया कि वर्ष 2022 में व्यापारी ने एक कार खरीदी थी। इस पर आईटीसी का लाभ ले लिया गया, जबकि जीएसटी अधिनियम की धारा-17(5) के प्रावधानों के अंतर्गत आईटीसी का लाभ व्यापारी नहीं ले सकता था। व्यापारी की ओर से दाखिल किए गए मासिक रिटर्न में भी अधिक आईटीसी का लाभ लिया गया है।
गड़बड़ी का पता चलने के बाद कंपनी की मौके पर जांच की गई। जब टीम ने आंकड़ों का मिलान कराया तो व्यापारी ने अपनी गलती मान ली। देर रात तक चली कार्रवाई के बाद व्यापारी ने 84.21 लाख रुपये जमा करा दिए हैं। वहीं बाकी राशि जल्द से जल्द जमा कराने का आश्वासन दिया है। जांच की कार्रवई संयुक्त आयुक्त राज्य कर योगेश कुमार विजय के नेतृत्व में की गई। इसमें उपायुक्त राज्य कर नोएडा आशीष शुक्ल, अंजेश बरनवाल, सहायक आयुक्त तारा चंद, अजय कुमार, राज्य कर अधिकारी विनोद कुमार मिश्र और प्रतीक कुमार गुप्ता आदि शामिल रहे।
यह होता है इनपुट टैक्स क्रेडिट
इनपुट टैक्स क्रेडिट या आईटीसी, एक कर है, जो व्यवसायी अपनी खरीद पर भुगतान करता है और बाद में इसका उपयोग बिक्री के समय अपनी कर देयता को समाप्त करने के लिए करता है। व्यवसायी अपनी खरीद पर भुगतान किए गए जीएसटी के लिए क्रेडिट का क्लेम करके अपने टैक्स भार को कम कर सकता है।