जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ बेहतर पुलिसिंग और अपराधियों व गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त लोगों पर कड़ी नजर रखने के लिए बीट एप तैयार किया जाएगा। इसके लिए जनपद के सभी थानों में बीट का निर्धारण कर दिया गया है। इन बीट में आरक्षी व मुख्य आरक्षी की तैनाती होगी। इस एप में उस बीट से संबंधित सारी सूचनाएं उपलब्ध होंगी। इससे अपराध पर अंकुश लगाना आसान होगा।
बीते साल जनपद में कमिश्नरेट लागू होने के बाद से बेहतर पुलिसिंग के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण बीट सिस्टम रहा। जनपद के सभी थानों में बीट का आवंटन हो गया है। बिसरख थाना क्षेत्र में तो बीट आरक्षियों की तैनाती भी की गई है। जल्द ही अन्य थानों में यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी। क्षेत्र में तैनात आरक्षी या मुख्य आरक्षी बीट पुलिस अधिकारी कहलाएगा। उसे एक पिस्टल या रिवाल्वर, वायरलेस, बॉडी वार्न कैमरे से लैस किया जाएगा।
यह कमिश्नरेट का पायलट प्रोजेक्ट है। इस सिस्टम के पूरी तरह से शुरू होने के बाद बीट एप बनाया जाएगा। इस पर बीट से संबंधित सभी सूचनाएं होंगी। बीट अधिकारी के तबादले से लेकर नए अधिकारी की तैनाती तक ब्योरा उपलब्ध होगा। बीट अधिकारी को छोटी घटनाओं से लेकर पासपोर्ट आदि की जांच के अधिकार भी मिल सकते हैं। अधिकारी व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने में जुटे हैं।
थाने-चौकियों का बोझ होगा कम
बीट सिस्टम शुरू होने के बाद थाने व चौकियों पर जांच का बोझ कम होगा। बीट अधिकारी प्रार्थना पत्र की जांच से लेकर सत्यापन तक का काम करेंगे। इसके लिए थाने स्तर से प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है। नए सिस्टम के तहत तीन से पांच हजार की आबादी पर बीट सिस्टम का निर्धारण होगा। सेक्टर के दो से तीन ब्लॉक बीट अधिकारी के दायरे में होंगे। गांवों व सोसाइटियों में भी इसका निर्धारण आबादी के हिसाब से ही किया जाएगा।
इस सिस्टम के तहत किसी भी शिकायत पर बीट अधिकारी पहले जांच करेंगे। वह अपनी रिपोर्ट सब इंस्पेक्टर या चौकी प्रभारी को देंगे। चौकी प्रभारी एसएचओ की जानकारी में लाकर मुकदमा पंजीकृत कराएंगे। अभी शिकायतों की जांच सब इंस्पेक्टर करते हैं। इसका असर उनकी विवेचनाओं पर पड़ता है, लेकिन बीट सिस्टम से विवेचनाओं की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।
सत्यापन का काम होगा बेहतर
बीट सिस्टम के शुरू होने पर एक सिपाही पर सेक्टर के दो से तीन ब्लॉक की जिम्मेदारी होगी। सोसाइटी में भी जनसंख्या के मुताबिक भी बीट होगी। बीट अधिकारी के पास हर घर, फ्लैट, दुकान की जानकारी रहेगी। इससे किरायेदार, घरेलू सहायक और चालक आदि का सत्यापन आसानी से होगा। सेक्टरों में रहने वाले लोगों पर भी पुलिस की नजर रहेगी।
एप के माध्यम से सेंट्रल डेटा बैंक तैयार किया जाएगा। बीट सिस्टम से अपराध पर अंकुश व अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी। लोगों में सुरक्षा का भाव भी बढ़ेगा।
- आलोक सिंह, पुलिस कमिश्नर