लखनऊ। जाली दस्तावेजों के सहारे कैश क्रेडिट सुविधा के जरिये बैंक से ऋण लेने, जाली वर्क ऑर्डर बनाकर बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले के बैंक ऑफ इंडिया की हजरतगंज मुख्य शाखा के तत्कालीन उप मुख्य प्रबंधक पंकज खरे और दो अन्य आरोपियों राजेश खन्ना व शमशुल हक सिद्दीकी को दोषी ठहराया गया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने तीनों को तीन-तीन साल की कैद और प्रत्येक पर 1.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
कोर्ट ने इसी मामले में अन्य आरोपी निजी कंपनी मेसर्स अनीता कांट्रैक्टर एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस मामले में सीबीआई की ओर से आरोपी बनाए गए सुधीर जैन और मोहम्मद इश्तियाक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी, जबकि कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में अनिता जैन को बरी कर दिया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले में आरोपी रहे प्रेम प्रकाश अस्थाना और पूनम सिन्हा को आरोपों से अवमुक्त कर दिया था।
सीबीआई की ओर से कोर्ट में बताया गया कि हजरतगंज स्थित बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा के तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक की शिकायत पर सीबीआई ने नौ जुलाई 2008 को रिपोर्ट दर्ज की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2004 से 2006 के दौरान आरोपियों ने आपस में मिलीभगत की और षड्यंत्र करते हुए निजी लाभ के लिए जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक के साथ धोखाधड़ी कर कैश क्रेडिट सुविधा ली।
आरोपियों ने कैश क्रेडिट सुविधा लेने के लिए फर्जी वर्क ऑर्डर लगाया और गिरवी रखने के लिए जमीन के फर्जी कागजात लगाए। इसके बाद लोन स्वीकृत कराया और रकम हड़प लिया। आरोपियों ने धोखाधड़ी करके बैंक को 6.80 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। सीबीआई ने विवेचना के बाद कंपनी के अलावा अन्य आठ आरोपियों के खिलाफ 23 दिसंबर 2009 को आरोप पत्र दाखिल किया था।