ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध जिला न्यायालय ने 13 किलो सोना व 57 लाख नकदी चोरी मामले में चार आरोपियों की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। जमानत पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने कहा है कि जब बरामद सामान का कोई दावेदार नहीं है और इसकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं है तो चोरी कैसे मानी जाए। मामले में गिरफ्तारी कैसे हो गई। कोर्ट ने जेल गए आरोपियों जय सिंह, नीरज, राजन भाटी व बंटी शर्मा की जमानत अर्जी स्वीकार की है। आरोपियों को नोएडा की सेक्टर-39 कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुशील भाटी ने बताया कि न्यायालय ने सुनवाई के दौरान तथ्य व साक्ष्यों के आधार पर चारों लोगों की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में सोना और नकदी किसलय पांडेय का काला धन होने का आरोप लगाया है। जबकि उच्च न्यायालय में किसलय पांडे ने याचिका दाखिल की है कि पुलिस ने कॉरपोरेट कंपनियों के कहने पर उन्हें फंसाने के लिए यह सोना और नकदी उनकी बताई है। ऐसे में न्यायालय ने चोरी का मामला स्पष्ट न होने की बात कही है। वहीं, यह भी कहा है कि चोरी नहीं है तो गिरफ्तारी कैसे संभव है। इस आधार पर न्यायालय ने चार आरोपियों की जमानत अर्जी स्वीकार की है।
न्यायाधीश ने जमानत पाने वालों को एक-एक लाख के व्यक्तिगत बंधन पत्र एवं दो-दो जमानती पेश करने के आदेश दिए हैं। आरोपी किसी भी स्थिति में साक्ष्यों को नष्ट अथवा मिटाने का प्रयास नहीं करेंगे और न ही किसी व्यक्ति को धमकी देंगे। पुलिस जांच का आरोपित सहयोग करेंगे। यदि आरोपित शर्तों का उल्लंघन करेंगे तो उनके खिलाफ फिर से कार्रवाई की जाएगी।
जिले में सबसे बड़ी चोरी होने का दावा
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित सिल्वर सिटी-2 सोसायटी के टावर नंबर बी-1 के फ्लैट नंबर 301 से 26 अगस्त 2020 को 40 किलो सोना व साढ़े छह करोड़ रुपये नकदी चोरी हुई थी। चोरों में बंटवारे को लेकर विवाद हो गया था। यह सूचना मुखबिर से पुलिस तक पहुंच गई। पुलिस अब तक कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में पता चला कि चोरी हुआ सामान अधिवक्ता किसलय पांडेय है जो कि खुद के भारत से बाहर होने का दावा कर रहा है। चोरी में शामिल मास्टमाइंड गोपाल अभी फरार है। उस पर इनाम घोषित है।
फुस्स हुआ पुलिस का दावा
पुलिस दावा कर रही थी कि आरोपियों अभी जमानत नहीं होगी। लेकिन अदालत में सुनवाई हुई तो उनको जमानत मिल गई। बताया जाता है जमानत के बाद आला अधिकारियों ने अधीनस्थों फटकार लगाई है। वहीं एक वकील ने बताया कि मामला केवल चोरी और चोरी का माल बरामद होने का था। इसमें जमानत मिलना आम बात थी। लेकिन पुलिस ने इस मामले को कुछ ज्यादा ही बड़ा दिखा दिया। जबकि चोरी के माल का अभी तक मालिक भी नहीं मिला है।