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तकनीकी राय लेकर नियमों में बदलाव करेगा प्राधिकरण : सीईओ

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रेलिंग रिस्की है : आए दिन ऊंची-ऊंची इमारतों से गिरकर होते हैं हादसे
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा की ऊंची-ऊंची इमारतों से गिरकर आए दिन लोगों की मौत के मामले सामने आते रहते हैं। इसमें कहीं बालकनी रेलिंग की डिजाइन गलत होने की बात कही जाती है तो कहीं इसकी गुणवत्ता में खामी का पता चलता है। कई सोसाइटियों में तो नियमों के इतर गलत तरीके से रेलिंग बनाने का मामला भी सामने आया है। सभी मामलों में सबसे ज्यादा चर्चा रेलिंग की ऊंचाई को लेकर है। रेलिंग की ऊंचाई पर्याप्त है या फिर इसे और बढ़ाना चाहिए, इस पर नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बिल्डरों, एओए और विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय रखी। कुछ बिल्डरों ने इमारत की ऊंचाई के बढ़ने के क्रम में हवा के दबाव का आकलन तक कराने की बात कही। ऐसे में भविष्य में इसका मजमून कैसा होगा, इस पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि कुमार एनजी
से अमर उजाला संवाददाता
सुशील पांडेय
ने खास बातचीत की।

सवाल: आए दिन हाईराइज इमारतों से गिरकर हादसों का मामला सामने आ रहा है। ऐसे में बालकनी रेलिंग की ऊंचाई बढ़ाने की जरूरत है या नहीं।
जवाब: हाल ही में एक बैठक की है, इसमें स्कूल, कॉलेज, अपार्टमेंट समेत अन्य प्रतिष्ठानों में इस तरह के हादसों से निपटने के लिए चर्चा हुई। इसमें आगे योजना बनाकर काम किया जाएगा। रेलिंग की ऊंचाई बढ़ानी चाहिए या नहीं, इस पर नियोजन विभाग की राय लेनी होगी क्योंकि वही नक्शा पास करते हैं। प्राधिकरण तकनीकी राय लेकर नियमों में बदलाव करेगा।
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सवाल: इसमें अगर किसी तरह का बदलाव करना पड़े तो बिल्डिंग बॉयलॉज में संशोधन करेंगे।
जवाब: किसी तरह के चैलेंज की स्थिति न बने। लिहाजा इस मामले में पहले विधि विभाग की भी राय लेनी होगी कि इस तरह के संशोधनों से पहले क्या करना चाहिए। संभावना है कि इसमें शासन की मंजूरी भी लेनी पड़ी। हालांकि हम इसमें आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

सवाल: इस तरह के मामलों की शिकायत कभी किसी ने की है क्या। आपके संज्ञान में यह मामला कैसे आया।
जवाब: मैं खुद भी एक सिविल इंजीनियर हूं और जहां कहीं भी रहा हूं तो इस बात का ख्याल जरूर रखा है कि स्कूल, अस्पताल, मार्केट कॉम्प्लेक्स, हाईराइज इमारतों से गिरकर मौत जैसे हादसे न हो पाएं। लोगों का बचाव करना पहली प्राथमिकता रही है। बंगलुरू में इस तरह के कई हादसे देखे हैं तो इससे निपटने के लिए उपायों पर हमेशा ध्यान दिया है।

सवाल: क्या नई परियोजनाओं में रेलिंग के नियमों में बदलाव करेंगे।
जवाब: विभागीय राय लेने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि नई परियोजनाओं के लिए किस तरह का फैसला लेना है। इससे पहले कई प्रकार की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा। लिहाजा एकदम से इस पर फैसला लेना मुश्किल है, लेकिन प्राधिकरण बदलाव के लिए तैयार है।


सवाल: क्या ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के अलावा दूसरी परियोजनाओं के लिए भी कोई योजना बनाएंगे।
जवाब: ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के अलावा शैक्षणिक संस्थानों, मेडिकल इंस्टीट्यूट, वाणिज्यिक संस्थानों में भी इस तरह के हादसों पर लगाम लगाने के उपाय किए जाएंगे। इससे निपटने के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी।
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सवाल: आप इस मामले में लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे।
जवाब: कई बार देखने में आता है कि लोग हों या संस्था, छोटी लापरवाही भारी पड़ती है। लिहाजा जिस स्तर पर लोग एक दूसरे को जागरूक करें उतना अच्छा है। प्राधिकरण की ओर से भी इस मामले में जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। बिल्डरों व अपार्टमेंट ऑनर एसोसिएशन से भी बातचीत की जाएगी ताकि लोग इस तरह के हादसों से अपना बचाव कर सकें।
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