-40-40 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के प्लांट लगवाए जाने हैं, लगाने वाली एजेंसी ही करेंगी संचालन
-एक प्लांट में 25 मीट्रिक टन गीले तो 15 मीट्रिक टन सूखे कूड़े के निस्तारण की होगी क्षमता
माई सिटी रिपोर्टर,
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण की तैयारी शहर को जीरो वेस्ट घोषित करने की है। यह जीरो वेस्ट सेल्फ संस्टेनबल श्रेणी में होगा। मतलब यह कि शहर से निकलने वाले कूड़े का कलेक्शन से लेकर निस्तारण तक बगैर प्राधिकरण के रुपया खर्च किए बनाई गई व्यवस्था से होगा। इसके लिए 6 कूड़ा निस्तारण के प्लांट प्राधिकरण निजी एजेंसियों से लगवाने जा रहा है। इनका संचालन बगैर मुनाफा और घाटा मॉडल पर प्राधिकरण करवाएगा। सेक्टर चिन्हित हो गए हैं। अब उन सेक्टर में प्लांट के लिए जगह प्राधिकरण का जन स्वास्थ्य विभाग तलाश रहा है। इसके बाद टेंडर जारी कर एजेंसियों से आवेदन लिए जाएंगे।
प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि यह प्लांट सेक्टर-79,119,62,50,43, 80 में लगाए जाने प्रस्तावित हुए हैं। इसमें गीले कूड़े से बायोमेथिनाइजेशन से सीएनजी या रसोई गैस बनेगी। वहीं सूखे कूड़े का निस्तारण मैटेरियल रिकवरी फैसेलिटी (एमआरएफ) सेंटर के जरिए होगा। गीले कूड़े का निस्तारण करने वाले प्लांट की क्षमता 25 मीट्रिक टन प्रतिदिन व सूखे कूड़े के लिए एमआरएफ की क्षमता 15 मीट्रिक टन की होगी। प्राधिकरण सिर्फ प्लांट लगाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाएगा। एजेंसियों का जिम्मा प्लांट स्थापित करने से लेकर कूड़ा कलेक्शन करने और उनके निस्तारण तक का होगा। गीले कूड़े के निस्तारण से निकलने वाली गैस व सूखे कूड़े की छटनी से निकलने वाले लोहे, कागज, प्लास्टिक बिक्री से एजेंसी अपना खर्च निकालेंगी।