- कासना स्थित औद्योगिक सेक्टर साइट-5 की प्रिंटिंग प्रेस से भड़काऊ सामग्री प्रकाशित करने का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यूपी एटीएस की टीम टेरर फंडिंग के केस में मंगलवार दोपहर को एक बार फिर कासना स्थित औद्योगिक सेक्टर साइट-5 पहुंची। वहां टीम ने करीब दो घंटे तक दस्तावेजों को खंगाला और कर्मचारियों से पूछताछ की। टीम की ओर से यहां काम करने वाले लोगों की जानकारी के साथ सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लिया है। एटीएस के आने की जानकारी स्थानीय कोतवाली पुलिस को भी नहीं हुई। एटीएस ने अपनी कार्रवाई से पुलिस को दूर रखा। एटीएस के आने के दौरान अंदर आने व जाने के दौरान प्रवेश और निकास पूरी तरह से वर्जित रहा। हालांकि अबतक कंपनी को सील नहीं किया गया है।
यूपी एटीएस ने 7 नवंबर को टेरर फंडिंग और बंग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने के आरोप में दिल्ली निवासी फरहान नबी सिद्दी को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया था। आरोपी की कंपनी इस्तांबुल इंटरनेशनल में प्रिंटिंग प्रेस लगाकर भड़काऊ सामग्री की किताबों का भी प्रकाशन हो रहा था। यहां पर प्रिंटिंग प्रेस, आरओ रिपेयरिंग और आयुर्वेद दवाओं के व्यापार के नाम पर भड़काऊ सामग्री का प्रकाशन हो रहा था। अबतक की जांच में आरोपी कंपनी को विदेशों से करीब 11 करोड़ रुपये आने की बात सामने आई है।
इस केस में यूपी एटीएस की जांच टीम पिछले मंगलवार को भी जांच के लिए पहुंची थी। वहां प्रिंटिंग प्रेस व अन्य कमरों में जाकर सबूत तलाश थे। एटीएस की ओर से मामले में दिल्ली धमाके के बाद मामले में जांच और तेज कर दी गई है। एटीएस की टीम की ओर से आरोपियों के पास से मिले बैंक खातों की जांच की जा रही है। जांच में पता चला है कि आरोपी की ओर से कंपनी में रिश्तेदारों को काम पर रखा था। जिस जगह पर भड़काऊ सामग्री की प्रिंटिंग्र होती थी। उस जगह पर सिर्फ चुनिंद लोगों को जाने की इजाजत थी।