प्रदूषण से अस्थमा के मरीजों की बढ़ी संख्या
नोएडा। प्रदूषण से अस्पतालों में अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बदलते मौसम और गिरते तापमान से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। विशेषकर बुजुर्ग और बच्चे बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में तकरीबन 60 फीसदी मरीज अस्थमा, ब्रोकांइटिस, एलर्जी और फेफड़े में संक्रमण के पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही सर्दी, जुकाम, बुखार, टॉन्सिलाइटिस, हाइपोथर्मिया के अलावा त्वचा की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। वहीं, बच्चों में जुकाम, खांसी, एन्फ्लूएंजा, न्यूमोनिया और बुजुर्गों में जोड़ों में दर्द के साथ नाक, कान, गला व सांस से संबंधी बीमारी के मामले पहले से ज्यादा सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में बृहस्पतिवार को मरीजों की संख्या 800 के पार पहुंच गई। डॉक्टरों के अनुसार प्रदूषण की मार सभी पर पड़ रही है। इन दिनों सबसे ज्यादा अस्थमा के मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। बदलते मौसम में जुकाम, खांसी और एन्फ्लूएंजा और वायरल संक्रमण की समस्या बढ़ जाती है। लोगों को खानपान एवं रहन-सहन में सावधानी बरतने की जरूरत है।
धूल के गुबार से ज्यादा परेशानी
निर्माणाधीन साइट और सेक्टरों में उड़ती धूल सांसों से फेफड़ों में समा जाती है। इससे दम घुटने जैसा महसूस होता है। शहर के किसी भी कोने में गुजरिए, धूल पीछा नहीं छोड़ती। इससे लोगों में बीमारियां बढ़ रही हैं। खासकर एलर्जी और अस्थमा के रोगी बड़ी संख्या में अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। कई निर्माण स्थलों को कवर नहीं किया जा रहा है और न ही पानी का छिड़काव किया गया है। इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत और एलर्जी हो रही है।
दवा के लिए भटकना पड़ रहा
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। बृहस्पतिवार को अस्पताल में मरीज दवा लेने की लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। जिला अस्पताल पहुंचे एक मरीज प्रमोद कुमार ने बताया कि सुबह से चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद उनके द्वारा लिखी गई कैल्शियम और आयरन की दवा के लिए भटक रहा हूं। काउंटर पर दवा नहीं होने की बात कही जा रही है।
ये सावधानी बरतनी चाहिए
- निर्माण स्थलों को पूरी तरह से ढका जाए।
- जहां मिट्टी हो, वहां पर लगातार पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए।
- जो सड़कें पहले खोदी जाएं, उनका निर्माण पहले करा दिया जाए।
- सभी विभागों को समन्वय बनाकर काम करना चाहिए।
अस्पताल मरीजों से भरा हुआ है। हर किसी को भर्ती कर इलाज करना मुश्किल हो गया है। इसलिए जितना हो सकता है, उतना परामर्श दिया जा रहा है। ताकि मरीज दवा खाकर घर पर आराम कर सकें।
- डॉ. वंदना शर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल