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Noida News: निर्माण शुरू होते ही पता चलेगा, कहां हो रहा अतिक्रमण

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इसरो की मदद से एआई मॉडल विकसित करेगा ग्रेनो प्राधिकरण
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-अतिक्रमण रोकने व भूमि प्रबंधन के लिए पहल
-तकनीक अपनाने वाला पहला प्राधिकरण बनेगा

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध निर्माण रोकने के लिए इसरो की मदद ली जाएगी। इसरो के वैज्ञानिकों की मदद और नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के सैटेलाइट डाटा का उपयोग कर एक पोर्टल विकसित किया जाएगा। यह पोर्टल एआई आधारित अतिक्रमण मॉनिटरिंग सिस्टम की तरह काम करेगा। इससे पता चल सकेगा कि कहां पर प्रतिबंध के बाद भी कॉलोनाइजरों द्वारा अतिक्रमण या अवैध रूप से निर्माण किया जा रहा है।

सीईओ एनजी रवि कुमार ने इसके लिए दोनों संस्थाओं के साथ एक एमओयू करने के लिए निर्देश दिया है। इस पर काम शुरू हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि एमओयू शीघ्र साइन करने की तैयारी चल रही है। ट्रायल के तौर पर पहले चरण का डाटा दिसंबर तक तैयार हो जाएगा। अगले साल मार्च के अंत तक पूरा पोर्टल विकसित करने की योजना है। अधिकारियों का दावा है कि यह पहल करने वाला देश का पहला विकास प्राधिकरण ग्रेनो होगा। योजना के मुताबिक नेशनल रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर एआई आधारित मॉडल, मॉनिटरिंग डैशबोर्ड और अलर्ट सिस्टम को विकसित करेगा। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण देगा। इसरो के सहयोग से भूमि संरक्षित करने, सार्वजनिक परिसंपत्तियों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता और सटीकता से काम हो सकेगा।
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सीईओ एनजी रवि कुमार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता, वैज्ञानिकता और अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इसमें एआई का उपयोग कर सैटलाइट इमेज को हाई रिजॉल्यूशन चित्रों का आकलन किया जाएगा। इससे अतिक्रमण की पहचान हो सकेगी। इसके साथ ही प्राधिकरण क्षेत्र में जमीन की उपलब्धता की भी सटीक जानकारी सिस्टम देगा। इससे प्रोजेक्टों के लिए जमीन को सुनिश्चित करना आसान हो सकेगा। जीआईएस आधारित इमेज प्राप्त होने से निर्णय लेने में आसानी होगी।
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शहरी प्रबंधन के लिए जरूरी है नई तकनीक
प्रोजेक्ट पर काम कर रहे सुमित यादव का कहना है कि एआई और सैटेलाइट डाटा से अतिक्रमण रोकने और इस पर कार्रवाई की क्षमता कई गुना बढ़ेगी। इसरो के सहयोग से विकसित यह मॉडल न केवल ग्रेटर नोएडा में भूमि संरक्षण को नई दिशा देगा, बल्कि अन्य विकास प्राधिकरणों और शहरी निकायों के लिए भी एक उत्कृष्ट उदाहरण और भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत करेगा। यह पहल आधुनिक शहरी प्रशासन, पारदर्शिता, सुशासन और सार्वजनिक हित के प्रति ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।
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