ग्रेटर नोएडा। सरकार की मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना में कोरोना से अनाथ बच्चों की मदद की जाएगी। उनकी चल और अचल संपत्ति को सुरक्षित करने का इंतजाम किया जाएगा। बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने ऐसे बच्चों के संरक्षक से योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन करने की अपील की है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गौतमबुद्ध नगर के सचिव विकास कुमार वर्मा ने बताया कि कोरोना काल में जो बच्चे माता-पिता को खो चुके हैं, उनकी मदद मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से की जाएगी। इसका मकसद बच्चों को गलत हाथों में जाने से बचाना है।
योजना में बच्चों के भरण पोषण, शिक्षा, चिकित्सा, लालन-पालन आदि की व्यवस्था की गई है। बताया कि शून्य से 18 साल तक के बच्चों को योजना में शामिल किया जाएगा। जिनके माता-पिता की कोरोना से मौत हो गई है या दोनों में से एक की मौत एक मार्च, 2020 से पहले और दूसरे की मौत कोरोना से हो गई है या माता-पिता की मौत एक मार्च, 2020 से पहले हो गई थी और कोरोना से संरक्षक की मौत हो गई है या माता-पिता में से एक की मौत कोरोना काल में हो गई और वह परिवार का मुख्य कर्ताधर्ता है। ऐसे परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पात्र शून्य से 10 वर्ष तक के बच्चे के संरक्षक के बैंक खाते में चार हजार रुपये प्रति माह दिया जाएगा। जो बच्चे पूरी तरह से अनाथ हैं और उनका बाल कल्याण समिति ने बाल्य देखभाल संस्था में दाखिल कराया है।
इन बच्चों को कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए अटल आवासीय और कस्तूरबा गांधी आवासी विद्यालय में प्रवेश दिया जाएगा। 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कक्षा 12 तक निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। संरक्षक को छुट्टी के दौरान चार हजार रुपये प्रति माह धनराशि दी जाएगी। अगर संरक्षक इन विद्यालय में बच्चों को प्रवेश नहीं दिलाना चाहते हैं तो देखभाल के लिए चार हजार रुपये प्रति माह दिए जाएंगे, जो बच्चे के 18 साल पूर्ण होने या 12वीं पास करने तक मिलेंगे। लड़कियों की शादी के लिए 101000 रुपये दिए जाएंगे। कक्षा नौ या इससे आगे और व्यावसायिक शिक्षा के 18 साल तक के छात्रों को टैबलेट और लैपटॉप मिलेगा। बच्चों की चल और अचल संपत्ति की सुरक्षा का भी इंतजाम होगा। उन्होंने बताया कि लोग ग्राम विकास पंचायत अधिकारी, ब्लॉक और जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में आवेदन जमा करा सकते हैं। शहरी क्षेत्र में लेखपाल, तहसील स्तर पर भी आवेदन जमा करा सकते हैं।