ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। दौला गांव स्थित एलआर सीनियर सेकंडरी स्कूल और घंघौला गांव स्थित चौधरी आरएल मेमोरियल स्कूल से प्रधानाचार्यों सहित करीब 24 शिक्षक विश्वविद्यालय के सभागार पहुंचे। ग्रामीण स्कूलों से आए शिक्षकों ने सम्मानित होने वाले शिक्षकों का तालियों के साथ स्वागत किया और उनकी उपलब्धियों पर खुशी जताई। इससे ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों को भी अपने कार्य को और बेहतर करने की प्रेरणा मलती है।
चौधरी आरएल मेमोरियल स्कूल के प्रधानाचार्य उपेश आर्य ने बताया कि शिक्षक का विद्यार्थियों के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है। एलआर स्कूल के प्रधानाचार्य अखिल खान ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान जैसी पहल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को पहचान देने के साथ दूसरे शिक्षकों को भी प्रेरित करती है। दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल की एकता धवन ने बताया कि पढ़ाने के तौर-तरीके समय के साथ बदले हैं। चाक-डस्टर से शुरू हुआ सफर अब स्मार्ट बोर्ड तक पहुंच चुका है। तकनीक का इस्तेमाल केवल आधुनिक दिखने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों की समझ आसान करने के लिए किया जाता है।
किसी ने झिझक दूर की तो किसी ने खेल के मैदान में संवारा
ग्रेनो वेस्ट स्थित एस्टर पब्लिक स्कूल की रुचि वशिष्ठ ने बताया कि कक्षा में कई बच्चे ऐसे होते हैं, जिन्हें जवाब पता होता है, लेकिन वे बोलने से डरते हैं। ऐसे छात्रों को लगातार अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सेंट मैरी स्कूल, ग्रेनो वेस्ट की छवि रावत ने बताया कि बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए उनकी नियमितता को भी पहचान दी जाती है। बेहतर उपस्थिति वाले छात्रों को सम्मानित करने से उनमें स्कूल आने को लेकर उत्साह बढ़ता है। स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल के शिक्षक अस्त कांत दास पिछले 17 वर्षों से बच्चों को खेलों से जोड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि खेल केवल प्रतियोगिता जीतने का माध्यम नहीं हैं। मैदान बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और हार के बाद दोबारा प्रयास करने का हौसला पैदा करता है।