रोजा जलालपुर गांव को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक दशक पहले भले ही स्मार्ट गांव घोषित कर दिया हो, लेकिन यहां के ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं आज तक नहीं मिल पा रही हैं। ग्रामीणों को रोजाना नई-नई समस्याओं का सामना पड़ता है। गांव के लोगों का कहना है कि गांव की सड़कों पर हालत बहुत ही दयनीय है। जगह-जगह जलभराव की समस्या से बनी रहती है। 14 साल बाद भी पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीण बोरवेल के पानी पर निर्भर हैं। सीवर लाइन को कई वर्ष बाद शुरू किया गया। अमर उजाला ने मंगलवार को ग्रेटर नोएडा के रोजा जलालपुर गांव में ग्रामीण संवाद आयोजित किया। जहां ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को रखा।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव को आने वाले चारों मुख्य मार्ग पूरी तरह से बदहाल पड़े हुए हैं। साथ ही गांव के अंदर की भी सड़कों की स्थिति बहुत खराब बनी हुई है। नालियों का ओवर फ्लो पानी सड़कों पर ही भरा रहता है। सड़कों की समस्या के संबंध में कई बार प्राधिकरण के अधिकारियों से मिलकर शिकायत की गई है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 12 महीने गांव की सड़कों पर जलभराव की समस्या बनी रहती है। स्कूल जाने वाले बच्चे कई बार गिरकर घायल भी हो चुके हैं। 14 वर्ष पहले पानी की सप्लाई के लिए पाइप लाइन बिछा दी गई थी। लेकिन आज तक पानी की सप्लाई पूरे गांव में शुरू नहीं हो सकी है। जिस कारण लोगों को बोरवेल के पानी के सहारे भी रहना पड़ता है। साथ ही गांव में सीवर की पाइप लाइन भी बिछी हुई है। आए दिन सीवर ओवर फ्लो होने की समस्या बनी रहती है। जिसका गंदा पानी सड़कों पर बहता है। लोगों ने आरोप लगाया कि गांव में सप्ताह में एक या दो दिन ही नालियों की समय से सफाई होती है। इसी तरह गांव की गलियों में जब कभी झाड़ू लगती है। गलियों की हालत भी खराब है।
श्मसान घाट में भरा रहता है पानी
गांव में बने बने श्मसान घाट में लगातार जलभराव होने से लोग इसका प्रयोग नहीं कर पाते हैं। काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने बताया कि गांव की करीब 25 हजार की आबादी है जिसमें एक केवल एक ही श्मसान घाट बना हुआ है इसके अलावा एक कब्रिस्तान बना हुआ है। लेकिन दोनों की स्थिति खराब हो रही है। गांव में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण श्मसान घाट में जलभराव रहता है। साथ ही कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल काफी छोटी बनी हुई है। जोकि क्षतिग्रस्त हो चुकी है। गांव की नालियां बनी होने के कारण अक्सर नालियों का पानी सड़कों पर बहा करता है। लेकिन कोई ध्यान नहीं देने वाला नहीं है।
क्रीड़ा स्थल नहीं होने के कारण 20-25 किमी जाना पड़ता है दूर
गांव में क्रीड़ा स्थल बनाए जाने की ग्रामीणों ने मांग रखी है। लोगों ने कहा कि क्रीड़ा स्थल नहीं होने के कारण बच्चों को खेल और भर्तियों की तैयारियां करने के लिए गांव से करीब 20 से 25 किमी दूर जाना पड़ता है। जिस कारण समय और रुपये दोनों की बर्बादी होती है। गांव में बारात घर नहीं होने के कारण लोगों को छोटे-छोटे भी कामकाज करने के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार प्राधिकरण से बारात घर बनवाए जाने की मांग की जा चुकी है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बिजली के खंभों पर लगी स्ट्रीट लाइटें शोपीस बनी हुई हैं। लगभग 80 फीसदी लाइटें जलती ही नहीं हैं। जिस कारण गांव की गलियों में रात के समय अंधेरा छाया रहता है। संवाद में धीरज तंवर, महकार तंवर, संतराम, पवन नागर, सतपाल नागर, अमीलाल प्रजापति, मामराज तंवर, कृष्ण प्रधान, रमजान खान, चांद प्रजापति, ओमप्रकाश, प्रेम सिंह नागर, उधम सिंह नागर, रतन लाल, जसवंत नागर आदि मौजूद रहे।