-माता-पिता का उस स्कूल में न पढ़ने और भाई-बहन के पढ़े न होने से दाखिले में मिलेंगे कम अंक
-अधिकतर स्कूलों ने पड़ोस के अंकों के बाद पूर्व छात्र व भाई-बहन मानकों को सर्वाधिक अंक दिए हैं
रश्मि शर्मा
नई दिल्ली। दिल्ली के निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी व पहली कक्षा में दाखिले के लिए जारी दाखिले की रेस में एल्युमनी(पूर्व छात्र) व सिबलिंग(भाई-बहन) मानकों के अंक से कुछ बच्चे दाखिले से दूर हो रहे हैं। इन दोनों मानकों से ऐसे अभिभावकों को परेशानी है जो ना उस स्कूल में पढ़े हैं और न ही उनका कोई और बच्चा उस स्कूल में पढ़ता और उनके पास एकल बालक है। इन दो मानकों को स्कूलों ने 10-20 तक अंक दिए हैं। अभिभावकों की शिकायत है कि इन मानकों से स्कूल परिवार वाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे उनका किसी नामी स्कूल में पढऩे का सपना भी सपना बनता दिख रहा है।
निजी स्कूलों में 28 नवंबर से दाखिला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जो कि 20 दिसंबर तक जारी रहेगी। आवेदन प्रक्रिया के लिए स्कूलों ने जो मानक शामिल किए हैं, वह जहां कुछ अभिभावकों के लिए राहत भरे हैं तो कई अभिभावक ऐसे भी है जिन्हें उनसे परेशानी हो रही है। अभिभावकों के लिए अपने पहले बच्चे का दाखिला कराना भी मुश्किल हो रहा है क्योंकि उन्हें सिर्फ पड़ोस के अंक ही मिल रहे हैं। कई स्कूलों ने एल्युमिनी(माता-पिता पूर्व छात्र), सिबलिंग(भाई-बहन का पढऩा) मानक को शामिल किया है।
पड़ोस(नेबरहुड) के बाद यह ही मानक हैं जिन्हें सर्वाधिक अंक दिए गए हैं। मसलन प्रेजेंटेशन कॉन्वेंट स्कूल ने पड़ोस(दूरी) के लिए 15-25 अंक, सिबलिंग के लिए 10, एल्युमनी के लिए 5-15 अंक दिए हैं। सेंट जेवियर स्कूल ने अपने मानकों में पड़ोस को 20-45, सिंबलिंग के लिए 10, एल्युमिनी के लिए पांच अंक तय किए हैं। गुरू नानक पब्लिक स्कूल ने पड़ोस को 10-30 अंक, सिबलिंग के लिए 20 व एल्युमनी के लिए 10 अंक तय किए हैं।
पहले बच्चे वाले अभिभावकों को होगा नुकसान
अब इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि जिन अभिभावकों का पहला बच्चा है उन्हें इन मानकों के अंकों का नुकसान हो रहा है। वहीं जिनके मां-बाप उस स्कूल में नहीं पढ़े उन्हें भी इन मानकों के अंक नहीं मिलेंगे। उन्हें सिर्फ एकल बच्चा व पड़ोस के अंक ही मिल रहे हैं। अभिभावक स्वाति अरोड़ा कहती हैं कि उन्हें आंशका है कि उन्हें सीट मिलेगी या नहीं, क्योंकि उनके पास केवल नेबरहुड के ही अंक हैं। एक अन्य अभिभावक राजीव गुप्ता कहते हैं कि उन्हें केवल पड़ोस व एकल बच्चे के ही अंक मिलेंगे जो कि 50 तक ही बन रहे हैं। जबकि दाखिला 70 से अधिक अंक बन पाने पर ही संभव होता है। यह तो ऐसा हो रहा है कि जैसे डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, नेता का बच्चा नेता व अभिनेता का बच्चा अभिनेता बनेगा।