- जमानत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को फिर से किया था गिरफ्तार
(अदालत से)
- विवेचक की रिमांड याचिका खारिज, आरोपी को तत्काल रिहाई का दिया आदेश
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिले की रिमांड मजिस्ट्रेट की अदालत ने धर्म परिवर्तन के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी मोहम्मद अमीन कोलू को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने विवेचक की रिमांड याचना को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी पहले से ही इस मुकदमे में जमानत पर है। उसकी जमानत को निरस्त किए बिना पुनः गिरफ्तारी उचित नहीं है।
28 अप्रैल 2025 को पीड़िता ने थाना फेज-1 नोएडा में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि मोहम्मद अमीन कोलू ने व्यावसायिक कार्य के बहाने उन्हें अपनी फैक्टरी बुलाया और वहां न केवल अशोभनीय हरकत की बल्कि जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह का दबाव भी बनाया। मामले में आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे सत्र न्यायालय गौतमबुद्धनगर से 7 मई 2025 को जमानत मिल गई थी। 13 सितंबर 2025 को विवेचक ने अमीन कोलू को फिर से गिरफ्तार किया और इस बार उस पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन अधिनियम-2024 की धारा भी जोड़ दी। विवेचक ने 14 दिन के न्यायिक रिमांड की मांग करते हुए आरोपी को कोर्ट में पेश किया। आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि यह गिरफ्तारी न्यायालय के जमानत आदेश का उल्लंघन है।
रिमांड मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि आरोपी अमीन कोलू पहले से इस मुकदमे में सत्र न्यायालय से जमानत पर है। जमानत आदेश अभी भी प्रभावी है। उसे निरस्त नहीं किया गया। ऐसे में नई धाराएं जोड़कर गिरफ्तारी करना कानूनन गलत है। मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि आरोपी पहले से जमानत पर है और जमानत निरस्त नहीं हुई है। इसलिए उसे तत्काल रिहा किया जाए। विवेचक को निर्देश दिया गया कि यदि वह धर्म परिवर्तन अधिनियम की धाराओं को केस में जोड़ना चाहते हैं तो इसके लिए सक्षम न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करें और अनुमति प्राप्त करें।