‘बदमाशों ने चंद रुपयों के लिए बेटे को मारकर मेरे घर का चिराग बुझा दिया। मैं नहीं चाहता कि जो बुरा वक्त मैंने झेला, वह किसी और पिता के सामने आए। सरकार और पुलिस ऐसी व्यवस्था करें, जिससे भविष्य में किसी और पिता को बेटे की अर्थी नहीं उठानी पड़े। कार लूट के दौरान हमले में मारे गए बीटेक छात्र अक्षय कालरा के पिता गुलशन कालरा ने शनिवार को यह बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि एक पिता के लिए सबसे बड़े दुर्भाग्य का वह दिन होता है जब उसे बेटे की अर्थी उठानी पड़े। बदमाशों ने चंद रुपयों के लिए कार लूटी, लेकिन इस घटना में उनका अनमोल बेटा चला गया। बदमाशों ने उनके घर का दीया हमेशा के लिए बुझा दिया। यदि सरकार और पुलिस उन्हें न्याय दिलाना चाहती हैं तो अपराधियों को ऐसी सजा दिलाएं कि दूसरों बदमाशों को भी सबक मिले। फिर कोई बदमाश किसी का बेटा नहीं छीन पाए। जो घटना मेरे साथ हुई वह किसी और पिता को नहीं झेलनी पड़े।
बेटा नहीं दोस्त चला गया
कानपुर में तैनात एलआईसी के चीफ इंजीनियर गुलशन कालरा बार-बार यही कह रहे थे कि अक्षय उनका बेटा ही नहीं बल्कि दोस्त भी था। बीमार होने के बाद भी वह पूरे परिवार का ध्यान रखता था। जब भी वह कानपुर से आते तो नई-नई डिश बनाकर उन्हें और अपनी मां को खिलाता था। अक्षय अच्छा कुक और बेटा होने के साथ-साथ अच्छा दोस्त भी था। वह हर काम में बेटे की सलाह लेते थे।
....तो बदमाशों को कार देकर कलेजे के टुकड़े को बचा लेती
बेटे की मौत पर मां गीता कालरा के आंसू नहीं थम रहे हैं। फफक-फफक रोती मां सिर्फ यही कर रही है कि उनके बच्चे ने किसी का क्या बिगाड़ा था। कार ले जानी थी तो ले जाते, उनके लाल को क्यों छीन लिया। काश मैं अक्षय के साथ होतीं तो बदमाशों के पैर पकड़कर और उन्हें कार देकर बच्चे को बचा लेती।
अक्षय पूरा दिन घर में पढ़ाई करता था। घर में किसी भी सामान की जरूरत होने पर शाम को लेने के लिए निकलता था। मां गीता कालरा को भी साथ लेकर जाता था। बुधवार रात खाना खाने के बाद उसने मां से कहा कि कार से घूमने चलेंगी तो उन्होंने तबियत ठीक नहीं होने की बात कहकर इनकार कर दिया था। मां ने अक्षय से भी बाजार जाने से मना किया और कहा कि सामान कल आ जाएगा। अक्षय रोजाना सोसाइटी में टहलने के दौरान पापा और बहन से बात करता था। बुधवार को बात करने के बाद वह कार लेकर बाजार की ओर निकल गया। मां ने अक्षय को इसलिए कॉल नहीं की, क्योंकि वह करीब साढ़े बारह बजे तक बाहर टहलता था।