केंद्र सरकार के निर्देश पर 200 स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग देगा एम्स
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20 फीसदी ऑक्सीजन की हो सकेगी बचत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अब कोरोना महामारी की तरह ऑक्सीजन की जरूरत होने पर अस्पतालों में समस्या गंभीर नहीं होगी। ऑक्सीजन के प्रबंधन को बेहतर बनाकर एम्स इस समस्या को दूर करेगा। मौजूदा समय में प्रबंधन बेहतर न होने से जिला स्तर के अस्पतालों में करीब 20 फीसदी तक ऑक्सीजन बर्बाद हो जाती है। इसकी रोकथाम कर ऑक्सीजन को भविष्य के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
दरअसल, केंद्र सरकार के निर्देश पर एम्स 200 स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग देगा। इसके लिए एक समझौता किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि काेरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन के अभाव में काफी मरीजों को परेशानी हुई। कई जगहों पर देखा गया कि मांग के अनुरूप ऑक्सीजन का इस्तेमाल नहीं हो पाया। मरीज ऑक्सीजन के लिए भटकते रहे। ऐसे में कई जगहों पर ऑक्सीजन की लीकेज समस्या बनी। सबसे ज्यादा समस्या जिला स्तर के अस्पतालों में मिली। भविष्य में फिर ऐसा न हो। इसे लेकर सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। एम्स इसमें प्रमुख भूमिका निभाएगा। अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक एम्स ट्रामा सेंटर व एडिशनल प्रोफेसर अस्पताल प्रशासन डॉ. विजयदीप सिद्धार्थ ने बताया कि ऑक्सीजन प्रबंधन के लिए यूके व यूएसए के नियम को फॉलो किया जाता है। इसके तहत ऑक्सीजन को तीन स्तर पर रखा जाता है। इसमें मुख्य स्तर, मुख्य स्तर के बैकअप व बकअप के आपातकालीन स्तर के लिए ऑक्सीजन को रखा जाता है। इसके लिए तीन तरह की व्यवस्था होती है, लेकिन देखा गया है कि जिला स्तर में दूसरे व तीसरे स्तर में सिलिंडर में ऑक्सीजन रखने के दौरान लीकेज की समस्या आती है। इसे दूर करने के लिए पहले 200 मास्टर प्रशिक्षक तैयार होंगे जो यह आगे चलकर जिला स्तर तक स्थिति को सुधारेंगे।
दवा की तरह काम करती है ऑक्सीजन
मरीज के लिए ऑक्सीजन दवा के तौर पर काम करती है। कितनी ऑक्सीजन देनी है। इसे कैसे रखना है। कब इस्तेमाल करना है। इसका प्रबंधन जरूरी है। कोरोना के दौरान प्रबंधन के अभाव ने मरीजों की दिक्कत बढ़ा दी थी। ऐसे में बड़े स्तर के अस्पतालों के साथ छोटे अस्पतालों में भी ऑक्सीजन के प्रबंधन को सुधारकर स्थिति को बेहतर बनाया जाएगा।
पूरे देश में बनेगी कड़ी
ऑक्सीजन के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए जो मानक बड़े अस्पताल में लागू हैं, उसे छोटे स्तर के अस्पताल में भी लागू किया जाएगा। एम्स से प्रशिक्षित होने वाले 200 मास्टर प्रशिक्षक आगे इस कड़ी को मजबूत करेंगे। यह देशभर के अस्पताल प्रशासकों और चिकित्सा अधिकारियों की क्षमता निर्माण का कार्य करेंगे, ताकि मेडिकल ऑक्सीजन के उचित संचालन व उपयोग, अपव्यय को कम करने और नैदानिक परिणामों में सुधार किया जा सके।