संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। अहोई अष्टमी पर्व सोमवार को मनाया जाना है। इस पर्व को लेकर बाजार में मिट्टी से बने बर्तन व झकरियाें की काफी बिक्री हुई। ऐसे में बाजार में काफी रौनक रही। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगल कामना के लिए व्रत रखती हैं।
ऐसे में इस पर्व को लेकर सुबह से ही बाजारों में पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ देखी गई। अहोई माता की तस्वीरें, सिंदूर, कलश, दीपक, चुनरी, खिलौने और मिठाइयों की दुकानों पर विशेष सजावट की गई है। वहीं, गृहिणियां अपने घरों को साफ-सुथरा कर अहोई माता की पूजा के लिए स्थान सजाया। दीवारों पर अहोई माता की पारंपरिक आकृति उकेरने की परंपरा भी इस अवसर पर निभाई जाती है।
महिलाएं मिट्टी या धातु की अहोई प्रतिमा की पूजा करती हैं, जबकि कुछ दीवार पर बनाई गई अहोई के चित्र की। अहोई अष्टमी के दिन माताएं सूर्योदय से पहले व्रत प्रारंभ करती हैं और दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं। शाम के समय तारे निकलने पर या सप्तर्षि तारा दिखाई देने के बाद अहोई माता की पूजा की जाती है।
पूजा में अहोई माता को दूध, हलवा-पूरी, गेहूं के दाने और चांदी के सिक्के अर्पित किए जाते हैं। पूजा के बाद व्रत कथा सुनने और तारा दर्शन करने की परंपरा होती है। इस पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। यह पर्व न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह मातृत्व के प्रेम, त्याग और अपने बच्चों के प्रति अनन्य समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है।