डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण के साथ ही नदियों में अनट्रीटेड सीवेज का बढ़ रहा दवाब, मैली हो रहीं नदियां
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पहाड़ से लेकर मैदानों तक पर्यावरण नियमों के उल्लंघन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का रुख लगातार कड़ा होता जा रहा है। एक तरफ जहां केदारनाथ धाम कॉरिडोर में सीवेज को लेकर ट्रिब्यूनल ने उत्तराखंड सरकार से जवाब तलब किया है, वहीं दूसरी तरफ नोएडा में यमुना और हिंडन नदियों की बदहाली व डूब क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण कार्यों को लेकर भी पर्यावरण मानकों की अनदेखी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां पर भी पर्यावरण मानकों की अनदेखी के चलते नदियों की स्थिति बदहाल हो गई है।
नोएडा सेक्टर 77 निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा एनजीटी में रखे गए तथ्यों से यह खुलासा हुआ है। अमित ने बताया कि 21 सितंबर को एनजीटी में दायर याचिका पर 6 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने केदारनाथ में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर कड़ा संज्ञान लिया। ट्रिब्यूनल के सामने रखे गए तथ्यों के बाद उत्तराखंड के मुख्य सचिव, डीएम रुद्रप्रयाग, सीपीसीबी के अध्यक्ष, नमामि गंगे, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल संस्थान को नोटिस जारी कर 17 दिसंबर तक जवाब मांगा गया है। पहाड़ों से लेकर एनसीआर के मैदानी इलाकों तक, नदियों के जल और इको-सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार विभागों की लापरवाही पर अब जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है।
नोएडा केे ग्राउंड वाटर पर एनजीटी में उठेंगे सवाल
अमित ने बताया कि नोएडा में यमुना और हिंडन एक नाले में तब्दील हो गई हैं। ऐसे में वह नोएडा के ग्राउंड वाटर की स्थिति जानने के लिए काम कर रहे हैं और जल्द ही ग्राउंड वाटर पर एनजीटी में याचिका भी दायर करेंगे। यदि यमुना और हिंडन का पानी दूषित होगा ऐसे में ग्राउंड वाटर रिचार्ज भी सही तरीके से नहीं होगा और लोगों को शुद्ध पानी भी नहीं मिल पाएगा।