सात वर्ष 10 महीने, 200 करोड़ खर्च, फिर भी परियोजना पर संशय
सेक्टर-96 में निर्माणाधीन प्रशासनिक भवन पर प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम. ने उठाए थे सवाल
इमारत की गुणवत्ता और मजबूती पर आईआईटी से मांगी थी रिपोर्ट
रिपोर्ट के बाद फिर से शुरू होगा निर्माण, 60 फीसदी काम हुआ पूरा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पांच जनवरी 2016 से अब तक सात वर्ष 10 महीने में सेक्टर-96 में प्रशासनिक भवन को बनाने में प्राधिकरण ने 200 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। परियोजना का 62 प्रतिशत काम भी पूरा हो गया, लेकिन अब प्राधिकरण खुद ही संशय में है। इमारत की गुणवत्ता और मजबूती को लेकर सीईओ ने आईआईटी से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट के बाद इसका काम दोबारा शुरू होगा, फिलहाल निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद है।
सपा शासनकाल में इस परियोजना की शुरुआत हुई। यह परियोजना काफी बड़ी थी, लेकिन तत्कालीन सीईओ रितु माहेश्वरी ने बजट कम करते हुए इसे छोटा कर दिया। इसमें प्राधिकरण का नया कार्यालय बनेगा। इसको बनाने में कई बाधाएं आईं, फिलहाल इसका बजट करीब 304 करोड़ है। इसमें पहले की एजेंसी को सीईओ ने ब्लैक लिस्ट करते हुए काम ले लिया गया, फिर दूसरी एजेंसी आई और काम शुरू हुआ लेकिन वर्तमान समय में काम बंद है। वर्तमान सीईओ लोकेश एम. ने परियोजना के निरीक्षण के दौरान कई सवाल उठाए और इसकी खामियां दूर करने के निर्देश दिए थे। सीईओ को इसके स्ट्रक्चरल डेवलपमेंट में कई खामियां मिली। इमारत की फिनिशिंग, पिलर की स्थिति, डिजाइन, इमारत की मजबूती आदि के नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई। कुछ बिंदुओं पर पूरी तरह से बदलाव की जरूरत महसूस की गई।
आईआईटी ने कर ली है जांच
आईआईटी की टीम ने परियोजना की करीब चार-पांच दिन तक जांच की और नमूने लिए। अब टीम प्राथमिक रिपोर्ट देगी। इसके बाद टीम एक बार फिर से साइट पर आएगी। उनकी ओर से कुछ अन्य कोणों से परियोजना की जांच की जाएगी। इसके बाद बताया जाएगा कि भविष्य में इस परियोजना का काम कैसे करना है ताकि इसकी मजबूती के अलावा डिजाइन आदि पर किसी तरह का सवाल न उठे।
रिपोर्ट के आधार पर शुरू होगा दोबारा काम
रिपोर्ट के बाद यह तय होगा कि इसके निर्माण का आगे का काम कैसे होगा। इसके लिए रोडमैप तैयार होगी, फिर बचा हुआ काम होगा। इसके आधार पर निर्माण के दौरान गलत स्थानों पर बनाए गए पिलरों को सही करने, आड़ी-तिरछी सीढि़यों को सुधारने, लोहे की संरचना आदि को ठीक करने का काम होगा। निर्माण की गुणवत्ता भी सुधारी जाएगी। इससे पहले कंसल्टेंट की रिपोर्ट में इस परियोजना पर सवाल उठाए गए थे। कंसल्टेंट की जांच में निर्माण सैंपल फेल होने की बात सामने आई थी। इनकी रिपोर्ट में गुणवत्ता केवल 50 प्रतिशत पाई गई थी।
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आईआईटी को प्रशासनिक भवन की जांच रिपोर्ट देनी है। रिपोर्ट के आधार पर आगे का काम शुरू होगा। इसमें कई प्रकार के संशोधन की संभावना है। - सतीश पाल, एसीईओ, नोएडा प्राधिकरण