ग्रेटर नोएडा में एक युवक ने दोस्त की हत्या की और साथियों के साथ मिलकर लाश नहर में फेंक दी। इसके बाद आरोपी मृतक दोस्त की पत्नी को थाने लेकर रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा। पुलिस ने जब जांच शुरू की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर कस्बे में परचून की दुकान चलाने वाले दीपक की आंबेडकर भवन में बुलाकर उसके दोस्तों ने चाकू से गोदकर हत्या कर दी और शव बोरे में भरकर नहर में फेंक दिया। वारदात की रात मुख्यारोपी गौरव दीपक की पत्नी के साथ रिपोर्ट दर्ज कराने सूरजपुर कोतवाली भी पहुंचा और पुलिस को गुमराह करता रहा।
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पुलिस ने मथुरा से दीपक का शव बरामद कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर और दो नाबालिग को अभिरक्षा में लेकर मामले का खुलासा कर दिया है। पुलिस का कहना है कि गौरव अपने पिता के इलाज के लिए दीपक से रुपये मांग रहा था। रुपये न मिलने पर गौरव ने अन्य साथियों के साथ हत्या की।
मृतक दीपक, आरोपी गौरव, अनिल उर्फ चील गांजा तस्करी व अन्य केस में जेल जा चुके हैं। इसलिए सूत्रों का यह भी दावा है कि आरोपियों ने गांजे के रुपये बंटवारे के विवाद में वारदात की है। एडिशनल डीसीपी सेंट्रल नोएडा राजीव दीक्षित ने बताया कि दीपक को उसके साथी गौरव ने कॉल कर आठ अगस्त को घर से बुलाया।
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इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर उसी दिन चाकू से गोदकर दीपक हत्या की और शव वैगनआर कार में ले जाकर खेरली नहर में फेंक दिया। हत्या, शव ठिकाने लगाने व साक्ष्य छिपाने के आरोप में पुलिस ने दीपक के साथी आंबेडकर कालोनी निवासी गौरव उर्फ पोपाया, अनिल उर्फ चील, सन्नी, गोल्डी उर्फ उदयराज व रॉकी को गिरफ़्तार कर लिया।
गोल्डी उर्फ उदयराज और रॉकी ने दीपक की बाइक को सफीपुर के जंगल में छिपा दिया था। दो नाबालिगों ने खून आदि साफ करने में आरोपियों की मदद की थी। दीपक के नहीं लौटने पर उसकी पत्नी ने गौरव को कॉल कर पूछताछ की।
इसके बाद व गौरव, दीपक की पत्नी व अन्य परिजन को लेकर एफआईआर दर्ज कराने सूरजपुर कोतवाली पहुंचा। उन्होंने बताया कि दीपक का नंबर चालू है। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की।
दूसरे युवकों का नाम लेकर किया गुमराह
आरोपी गौरव ने पुलिस को बताया कि दीपक का दो दिन पहले तीन युवकों से झगड़ा हुआ था। पुलिस ने उन युवकों से भी पूछताछ की। दीपक की मोबाइल लोकेशन लखनावली के पास मिली।
नौ अगस्त को पुलिस ने मोबाइल बरामद कर लिया और दस अगस्त को अपहरण का केस दर्ज कर आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की और उनकी निशानदेही पर मथुरा से शव बरामद किया। आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। आरोपी गौरव पिज्जा की दुकान पर नौकरी करता था।
पांच साल पहले की थी गौरव के पिता की मुखबिरी
गौरव के पिता को पांच साल पहले पुलिस ने चोरी के मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। गौरव को यह भी शक था कि दीपक ने मुखबिरी की थी। इसे लेकर भी वह मन में रंजिश रखता था। दीपक को अपने पिता की आंखों के ऑपरेशन के लिए 80 हजार रुपयों की जरूरत थी।