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घर का चिराग तो बेटा ही होता है इस सोच को बदलने की जरूरत : मेधा रूपम

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- जिलाधिकारी ने अमर उजाला ओपन हाउस में महिला सशक्तीकरण पर रखे अपने विचार
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले में 0 से 6 साल का चाइल्ड सेक्स रेशियो देखने से पता चलता है कि बच्चियों की संख्या बालकों के मुकाबले नहीं बढ़ रही। ऐसे में यह समझ में आता है कि समाज में आज भी घर का चिराग बेटे को ही समझा जाता है। इसे बदलने की जरूरत है। इस लड़ाई में आप अकेले नहीं हैं हम सब आपके साथ हैं। शनिवार को यह बात जिलाधिकारी मेधा रूपम ने अमर उजाला की ओर से आयोजित ओपन हाउस सेशन में कहीं।
उन्होंने कहा कि यह माना जाता है कि महिलाओं को कुछ करना है तो पुरुषों को पीछे जाना पड़ेगा। यह सत्य नहीं है। सत्य यह है कि महिलाओं को आगे आना होगा। पुलिस फोर्स, थाने, तहसील, परिवहन विभाग, विकास भवन, अस्पताल, पत्रकारिता में जब महिलाएं आगे होंगी तो ऐसी तममा जगहें उनके लिए अपने आप सुरक्षित हो जाएंगी। डीएम ने हमेशा बड़ा सपना देखने का सुझाव दिया। उन्होंन कहा कि जब सपना बड़ा होगा तो आपका प्रयास भी बड़ा होगा। ऐसे में बड़ा सपना पूरा भी होगा। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम खुद को ही रोक लेते हैं कि यह सपना बहुत बड़ा है और शायद हम सपने में खो गए हैं या लोगों की बातों में आ जाते हैं। यदि महिला ठान लें तो कोई भी ताकत उसे रोक नहीं सकती। खुद भगवान उसका हाथ थामते हैं।
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बड़ी नानी के अंतिम संस्कार पर आगे आए थे हम और बहनें
डीएम ने बताया कि बड़ी नानी के निधन के बाद अंतिम संस्कार के वक्त परिवार की सभी बुजुर्ग महिलाएं पीछे हो गई थीं। उस समय उन्होंन अपनी बहनों संग आगे आने का निर्णय लिया था। ऐसे फैसलों में बड़ों का साथ रखने के लिए हमने हमने अपनी मां का हाथ पकड़ा था।
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डीएम ने की पुलिस कमिश्नर की तारीफ

डीएम मेधा रूपम ने मंच से ही पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि नोएडा में आज कोई महिला सड़क पर चलती है और वह अपने आप को सुरक्षित महसूस करती है तो उसका श्रेय पुलिस कमिश्नर को जाता है।
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